उत्तराखंड सरकार(Uttarakhand Government) ने गिरते भूजल स्तर को लेकर बड़ा कदम उठाया है और अवैध रूप से पानी के दोहन पर अब पहले से कहीं ज्यादा सख्ती की जाएगी। नए नियमों के तहत बिना अनुमति भूजल का उपयोग करने या अवैध बोरिंग कराने वालों पर अब दोगुना जुर्माना लगाया जाएगा। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे इलाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जाने के कारण प्रशासन ने निगरानी और कड़ी कर दी है। खासकर उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां पानी का अत्यधिक उपयोग हो रहा है।
नई व्यवस्था के अनुसार होटल, रिसॉर्ट, उद्योग, आवासीय परियोजनाएं और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को भूजल इस्तेमाल करने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। इसके लिए संबंधित विभाग से निर्धारित शुल्क देकर एनओसी लेना अनिवार्य किया गया है। बिना अनुमति पानी निकालने या बोरिंग कराने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा साथ ही पुराने मामलों की भी जांच की जाएगी।
सरकार ने राज्य को चार हिस्सों में बांटा
सरकार ने पूरे राज्य को भूजल की स्थिति के आधार पर चार हिस्सों में बांटा है सुरक्षित, अर्द्ध-संवेदनशील, संवेदनशील और अत्यधिक दोहित क्षेत्र। जिन इलाकों में पानी का स्तर ज्यादा गिर चुका है, वहां पानी के इस्तेमाल पर विशेष नियंत्रण लागू किया गया है। हरिद्वार के भगवानपुर और लक्सर, देहरादून के राजपुर रोड और सहस्रधारा रोड, तथा नैनीताल के काठगोदाम और गोलापार जैसे क्षेत्रों में निगरानी और सख्त कर दी गई है।
वहीं, सरकार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कुछ रियायतें भी दी हैं। जो संस्थान वर्षा जल संचयन और पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था करेंगे उन्हें भूजल शुल्क में छूट मिलेगी। इसके अलावा 300 वर्ग मीटर से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार ने सख्त नीति की लागू
सरकार का कहना है कि बढ़ते निर्माण कार्य, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण राज्य में पानी पर दबाव बढ़ा है जिससे कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है। इसी को देखते हुए अब भूजल संरक्षण को लेकर सख्त नीति लागू की जा रही है।