पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां शुक्रवार को श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने बेअदबी विरोधी प्रस्तावित कानून को लेकर अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी सरकार की मंशा और कानून की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बेअदबी से जुड़े मामलों पर बनाए जा रहे नए कानून को लेकर पिछले कुछ दिनों से धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा चल रही थी। इसी मुद्दे पर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से स्पीकर को बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया था।
कानून बनाने की प्रक्रिया पर जताई गई थी आपत्ति
दरअसल, श्री अकाल तख्त साहिब ने बेअदबी जैसे संवेदनशील विषय पर कानून तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज का कहना था कि सिख पंथ से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सामूहिक राय लेना जरूरी है। साथ ही, धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पंथक मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब की भूमिका सर्वोच्च मानी जाती है, इसलिए ऐसे मुद्दों पर कोई भी फैसला लेने से पहले धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सरकार और धार्मिक संस्थाओं के बीच बढ़ी चर्चा
बेअदबी विरोधी कानून को लेकर पंजाब में अब राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार का कहना है कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून जरूरी है। जबकि धार्मिक संगठनों का मत है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में धार्मिक संस्थाओं की राय लेना जरूरी है।
श्री अकाल तख्त साहिब सम्माननीय – स्पीकर कुलतार सिंह संधवां
श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचने से पहले ही स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा था कि उनके लिए श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च और सम्माननीय संस्था है। उन्होंने कहा कि वह पूरे सम्मान और विनम्रता के साथ अपना पक्ष रखने पहुंचे हैं। कुलतार सिंह संधवां ने यह भी कहा कि उन्होंने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को व्यक्तिगत रूप से पूरे मामले की जानकारी दी है, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी की स्थिति न बने।
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