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‘पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो…’ , मौत से पहले वकील ने लिखा भावुक संदेश, 5वीं मंजिल से कूदकर की आत्महत्या

कानपुर के कोर्ट(Kanpur lawyer) परिसर से एक दिल दहलाने और आत्मा को छू जाने वाली एक घटना सामने आई है। एक युवा वकील, जिसने अभी अपने करियर की शुरुआत भी नहीं की थी, उसका इस तरह दुनिया से चले जाना मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक दबाव के गंभीर पहलुओं की ओर इशारा करता है। इस घटना ने इस वक्त कई बड़े सवालों को खड़ा कर दिया है।

अदालत भवन की पांचवी मंजिल से लगाई छलांग

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर कोर्ट में गुरुवार को उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब 24 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने अदालत भवन की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। इसके बाद लोगों ने उन्हें उर्सुला अस्पताल (UHM) पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

2 पन्नों का नोट लिखकर स्टेटस पर लगाया

इस बड़े कदम को उठाने से ठीक पहले, दोपहर करीब 12:05 बजे प्रियांशु ने अपने मोबाइल पर दो पन्नों का एक बड़ा सा नोट लिखा। उन्होंने इसे न केवल अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया, बल्कि अपने पिता और दोस्तों को पर्सनली भी भेजा। लेकिन अफसोस कि जब तक लोग इस संदेश को पढ़कर कोई कार्रवाई करते, तब तक देर हो चुकी थी।

Advocate Priyanshu's Final Wish: "Everyone, please read this suicide note of mine through to the very end..."

सुसाइड नोट में छलका बचपन का दर्द

प्रियांशु ने अपने आखिरी पन्ने में किसी बाहरी दुश्मन को नहीं, बल्कि अपने ही घर के माहौल को अपनी स्थिति का जिम्मेदार ठहराया।प्रियांशु ने लिखा कि उनके पिता उन पर हर मिनट शक करते थे और छोटी-छोटी बातों पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उन्होंने उल्लेख किया कि महज 6 साल की उम्र में फ्रिज से जूस पीने जैसी छोटी बात पर उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया गया था।

हाईस्कूल की परीक्षा के दौरान भी उन्हें पिता की ओर से कम नंबर आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। इसके बाद प्रियांशु ने भावुक होते हुए लिखा, “मैं हार गया, पापा जीत गए। मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे पिता मेरे पार्थिव शरीर को स्पर्श भी न करें।”

करियर की दहलीज पर टूट गया सपना

प्रियांशु ने साल 2025 में ही अपनी वकालत (LLB) की पढ़ाई पूरी की थी। वह एक पंजीकृत अधिवक्ता तो बन चुके थे, लेकिन समय की कमी के चलते उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, प्रयागराज से अपना अंतिम प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर पाए थे। उन्होंने लिखा कि “बेगैरत की जिंदगी” जीने से बेहतर उन्होंने मौत को गले लगाना समझा।

पुलिस कर रही जांच

पुलिस ने प्रियांशु का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। सुसाइड नोट और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। इसके साथ ही कोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

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