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भुखमरी के कगार पर कंगाल पाकिस्तान, एक बंडल नोट से भी नहीं भर रहा सब्जियों का झोला

पाकिस्तान इस समय दोहरी महंगाई की मार झेल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले 450-520 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं। हाल ही में सरकार ने कुछ राहत दी है, लेकिन आम आदमी की जेब पर बोझ कम नहीं हुआ है।

सब्जियों की आसमान छूती कीमतें

सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को सब्जियों और किराने की महंगाई से है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सब्जी मंडियों की स्थिति दिखाई जा रही है। टमाटर, प्याज, आलू, बैंगन जैसी रोजमर्रा की सब्जियों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि एक छोटे थैले के लिए भी 500-600 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। लोग कह रहे हैं कि “एक बंडल नोट से भी झोला नहीं भर रहा।”

 

 

स्थानीय कारण और ट्रांसपोर्टेशन का असर

महंगाई का असर सिर्फ वैश्विक कारणों से ही नहीं है। पाकिस्तान में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्टेशन के खर्च को बढ़ा दिया है। किसान मंडी तक सब्जियां ले जाने में अधिक खर्च कर रहे हैं, जो अंत में उपभोक्ता पर पड़ रहा है। उर्वरक की कीमतें बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ गई है। नतीजतन, थोक और खुदरा दोनों बाजारों में सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।

सरकारी राहत और उसका असर

सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत दी है। 11 अप्रैल 2026 से पेट्रोल 366 रुपये और डीजल 385 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है, जबकि पहले डीजल 520 रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, इस राहत का असर सब्जियों की महंगाई पर नहीं पड़ा है। ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन अब भी प्रभावित है।

जनता की प्रतिक्रिया और भविष्य की आशंका

सोशल मीडिया पर लोग नाराजगी जता रहे हैं और सरकार से अधिक राहत की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबा चला, तो महंगाई और बढ़ सकती है। तेल आयात पर निर्भर पाकिस्तान में ईंधन की महंगाई सीधे सब्जी उत्पादन और वितरण पर असर डालती है। कई परिवार अब कम सब्जियां खा रहे हैं या सस्ते विकल्पों की तलाश में हैं। मांसाहारी भोजन की कीमतें बढ़ने से उसका सेवन भी घटा है।

पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई ने आम नागरिक की थाली को प्रभावित किया है। पेट्रोल और डीजल की महंगाई के साथ-साथ सब्जियों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम ने आम परिवार के खर्च को भारी बना दिया है। विशेषज्ञ और जनता दोनों इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद रख रहे हैं।

 

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