WhatsApp को दुनिया का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म माना जाता है और कंपनी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षा का दावा करती है। लेकिन साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि असली खतरा एन्क्रिप्शन से नहीं, बल्कि उन फीचर्स से है जिनका गलत इस्तेमाल कर हैकर्स यूजर्स को निशाना बनाते हैं।
एन्क्रिप्शन नहीं देता पूरी सुरक्षा
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर किसी यूजर का फोन या अकाउंट ही हैक हो जाए, तो एन्क्रिप्शन बेअसर हो जाता है। ऐसे में हैकर्स आसानी से चैट्स तक पहुंच सकते हैं। यानी सुरक्षा सिर्फ ऐप पर नहीं, बल्कि यूजर के व्यवहार पर भी निर्भर करती है।
OTP और लॉगिन सिस्टम सबसे बड़ा खतरा
WhatsApp का OTP और लॉगिन वेरिफिकेशन सिस्टम सबसे ज्यादा दुरुपयोग होने वाला फीचर है। हैकर्स कॉल या मैसेज के जरिए OTP हासिल कर लेते हैं और अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं। यह तरीका पुराना होने के बावजूद आज भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल में है।
Linked Devices फीचर से बढ़ता जोखिम
WhatsApp Web या Linked Devices फीचर भी बड़ा खतरा बनकर उभरा है। अगर किसी को कुछ समय के लिए भी फोन का एक्सेस मिल जाए, तो वह अकाउंट को दूसरे डिवाइस से लिंक कर सकता है। इसके बाद बिना फोन छुए ही चैट्स पढ़ी जा सकती हैं। कई यूजर्स इस बात पर ध्यान नहीं देते कि उनका अकाउंट किन डिवाइस से जुड़ा हुआ है।
ऑटो डाउनलोड फीचर से बिना क्लिक भी हमला
ग्रुप और मीडिया ऑटो डाउनलोड फीचर भी जोखिम भरा साबित हो रहा है। हाल के मामलों में सामने आया है कि हैकर्स सिर्फ किसी ग्रुप में जोड़कर और मालिशियस फाइल भेजकर डिवाइस को संक्रमित कर सकते हैं। कई बार यह अटैक बिना किसी फाइल को खोले भी हो सकता है।
बैकअप सिस्टम में भी खतरा
WhatsApp का बैकअप फीचर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अगर Google Drive या iCloud अकाउंट सुरक्षित नहीं है, तो वहां से चैट्स एक्सेस किए जा सकते हैं। रिसर्च में यह भी पाया गया है कि बैकअप में मेटाडेटा लीक होने की संभावना रहती है।
Can’t trust WhatsApp https://t.co/Ts55gVXqkD
— Elon Musk (@elonmusk) April 9, 2026
मेटाडेटा से ट्रैक हो सकती है गतिविधियां
भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों, लेकिन मेटाडेटा के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कौन किससे, कब और कितनी बार बात कर रहा है। इससे किसी व्यक्ति की दिनचर्या तक का अंदाजा लगाया जा सकता है।
WhatsApp का Contact Discovery फीचर भी खतरे से खाली नहीं है। रिसर्चर्स ने इस फीचर के जरिए करोड़ों फोन नंबर और उनसे जुड़ी जानकारी निकालने में सफलता हासिल की थी, जिससे यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल खड़े हुए हैं।
लापरवाही बनती है सबसे बड़ी कमजोरी
WhatsApp खुद भी मानता है कि एन्क्रिप्शन के बावजूद प्लेटफॉर्म 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर खतरे यूजर्स की लापरवाही और फीचर्स के गलत इस्तेमाल से पैदा होते हैं। ऐसे में सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

