मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला परिसर के बाहर हिंदू समाज ने सत्याग्रह आयोजित करते हुए हनुमान चालीसा(Hanuman Chalisa) का सामूहिक पाठ किया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने परिसर का निरीक्षण किया और कहा कि यहाँ शिवलिंग, मूर्तियां और अन्य धार्मिक चिन्ह मौजूद हैं। उनके अनुसार ये सब इस स्थान के मंदिर होने के साक्ष्य हैं। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि परिसर में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित कर पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए, जबकि नमाज पर रोक लगाई जानी चाहिए।
हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह स्थान मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है और इसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता। विवादित स्थल एएसआई (Archaeological Survey of India) के संरक्षण में है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। हिंदू पक्ष की दलीलों में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर परिसर का मंदिर होने का दावा किया गया।
राजा भोज द्वारा बनवाई गई थी संरचना
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में बताया कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, मंडप और हवन कुंड मौजूद हैं। ये संकेत बताते हैं कि यह स्मारक कभी हिंदू धर्म से जुड़ा था। जैन ने कहा कि यह संरचना धार के परमार राजवंश के राजा भोज (1034 ई.) द्वारा बनवाई गई थी और मुस्लिम आक्रमणों के बावजूद हिंदू धार्मिक चिन्ह आज भी मौजूद हैं।
वहीं, जैन ने कोर्ट को याद दिलाया कि एएसआई संरक्षित स्मारकों का धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता, इसलिए भोजशाला में केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। मुस्लिम पक्ष के वकील ने याचिका से जुड़े सभी दस्तावेजों की कॉपियां उपलब्ध कराने की मांग की, जिसे हाईकोर्ट ने मान लिया। अब सभी पक्षों की दलीलों के बाद अदालत अंतिम निर्णय लेगी।