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खेड़ा का बनेगा पेड़ा! गुवाहाटी से ‘दिल्ली’ फिर दिल्ली छोड़कर हैदराबाद भाग गया पवन खेड़ा – CM हिमंता बिस्वा सरमा

असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी माहौल बेहद गरमा गया है। मंगलवार 7 अप्रैल को असम पुलिस ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित निजामुद्दीन ईस्ट आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के आधार पर की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है।

आरोपों से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, कुछ दिन पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि रिंकी भुइयां के पास यूएई, मिस्र और एंटिगुआ-बारबुडा जैसे देशों के कई पासपोर्ट हैं। साथ ही दुबई में महंगी संपत्तियों और अमेरिका में भारी निवेश होने की भी बात कही थी। पवन खेड़ा ने यह भी कहा था कि ये दस्तावेज उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से मिले हैं और कांग्रेस जल्द ही और सबूत पेश करेगी।

CM सरमा का पलटवार

इन आरोपों को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह फर्जी, फोटोशॉप्ड और भ्रामक दस्तावेज हैं। CM  हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ये जानकारी “पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप” से उठाई है और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दस्तावेजों में गलत स्पेलिंग, अमान्य QR कोड और अन्य तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए इन्हें नकली बताया।

FIR के बाद तेज हुई कार्रवाई

विवाद बढ़ने के बाद रिंकी भुइयां शर्मा ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया। इसके बाद असम पुलिस ने जांच शुरू की और दिल्ली में उनके घर पर छापेमारी की गई। बता दें कि पुलिस इससे पहले पवन खेड़ा गुहावटी के जिस होटल में ठहरे में वहां भी जांच पड़ताल की गई। इसके बाद पुलिस टीम पूछताछ और दस्तावेज जुटाने के लिए दिल्ली पहुंची थी। हालांकि उस समय पवन खेड़ा घर पर मौजूद नहीं थे। छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि पवन खेड़ा गुवाहाटी से निकलकर हैदराबाद चले गए हैं। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

असम में 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है और चुनाव प्रचार भी समाप्ति के करीब है। ऐसे समय में हुई इस कार्रवाई ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। बीजेपी इस मामले को अंतरराष्ट्रीय साजिश और प्रोपेगैंडा बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बता रही है।

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