IITian Baba Abhay Singh: प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चा में आए ‘IITian बाबा’ अभय सिंह ग्रेवाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह सिर्फ उनका आध्यात्मिक जीवन नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी और उससे जुड़ा बड़ा विजन है। उन्होंने अपनी मुलाकात से लेकर शादी और अब ‘श्री यूनिवर्सिटी’ बनाने के प्लान तक की पूरी कहानी साझा की है। अभय सिंह के मुताबिक, वे लंबे समय बाद दिल्ली से झज्जर पहुंचे थे और पिछले डेढ़ से दो साल से इसी क्षेत्र में रह रहे हैं। प्रयागराज कुंभ के बाद उनका रुझान इसी दिशा में बढ़ा। इस दौरान उनकी जिंदगी में एक अहम मोड़ तब आया, जब उनकी मुलाकात प्रीतिका से हुई।
आश्रम में हुई पहली मुलाकात
अभय सिंह बताते हैं कि उनकी और प्रीतिका की पहली मुलाकात कोयंबटूर के सत्गुरु आश्रम में महाशिवरात्रि के दौरान हुई थी। दोनों वहां साधना के लिए पहुंचे थे। यहीं से बातचीत शुरू हुई और यह मुलाकात आगे चलकर एक रिश्ते में बदल गई। इसके बाद दोनों की मुलाकात प्रयागराज कुंभ में भी हुई, जहां उनका संबंध और गहरा हो गया।
मंदिर में रचाई शादी
अभय सिंह ने बताया कि उनकी शादी कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। 15 फरवरी को हिमाचल प्रदेश के एक मंदिर में उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज से विवाह किया। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज कर इसे कानूनी रूप दिया गया। झज्जर पहुंचने का मकसद भी इसी कागजी प्रक्रिया को पूरा करना था, जहां यह खबर सामने आई। प्रीतिका, जो बेंगलुरु की रहने वाली हैं और मूल रूप से कर्नाटक के मंगलौर से हैं, पेशे से इंजीनियर हैं। हालांकि अब उनका झुकाव भी आध्यात्मिक जीवन की ओर है। अभय सिंह के अनुसार, दोनों का लक्ष्य एक ही है, साधना और एक साझा विजन पर काम करना।
अब ‘श्री यूनिवर्सिटी’ का बड़ा प्लान
शादी के बाद अभय सिंह ने अपने अगले बड़े प्रोजेक्ट ‘श्री यूनिवर्सिटी’ का खुलासा किया है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं होगा, बल्कि एक “एनर्जाइज्ड स्पेस” होगा, जहां विभिन्न प्रकार की साधनाएं और आध्यात्मिक शोध किए जाएंगे। वे बताते हैं कि इस यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता, साधक और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े लोग एक साथ काम करेंगे। इसका उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को फिर से जीवित करना और उसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना है।
साइंस और स्पिरिचुअलिटी को जोड़ने की कोशिश
अभय सिंह का मानना है कि आज के समय में विज्ञान और आध्यात्म को अलग-अलग देखा जाता है, जबकि दोनों का समन्वय जरूरी है। उनका विजन है कि ‘श्री यूनिवर्सिटी’ में साइंस, स्पिरिचुअलिटी और यहां तक कि कानून जैसे विषयों को भी एक साथ समझने की दिशा में काम किया जाएगा।
सभी परंपराओं को एक मंच पर लाने की योजना
उनका लक्ष्य सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है। वे इसे एक ऐसा मंच बनाना चाहते हैं जहां नाथ संप्रदाय, ब्राह्मण परंपरा, मंत्र साधना करने वाले और जूना अखाड़ा जैसे विभिन्न संप्रदाय एक साथ आ सकें। उनके अनुसार, वर्तमान में ये सभी अलग-अलग काम कर रहे हैं, लेकिन जरूरत है कि इन्हें एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए।
महाकुंभ से मिली पहचान
अभय सिंह ग्रेवाल को पहचान प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मिली, जहां उनके IIT बैकग्राउंड और आध्यात्मिक जीवन के अनोखे मेल ने लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर भी उन्हें लेकर काफी चर्चा हुई थी। अब शादी और ‘श्री यूनिवर्सिटी’ के प्लान के साथ वे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।
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