राजनीति में जहां आमतौर पर बड़े और स्थापित नामों का दबदबा रहता है, वहीं अशोक मित्तल का उभार एक अलग कहानी पेश करता है। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में अहम जिम्मेदारी देकर यह संदेश दिया है कि अब शिक्षा और अनुभव को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने राघव चड्डा जैसे चर्चित नेता की जगह ली है, जो इस फैसले को और खास बनाता है।
छोटे कारोबार से बड़े सपनों की शुरुआत
अशोक मित्तल का जन्म जालंधर में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता ने ‘लवली स्वीट्स’ नाम से एक छोटा मिठाई व्यवसाय शुरू किया था। मित्तल ने अपने भाइयों के साथ इस काम में हाथ बंटाया, लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा था। यहीं से उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदलने का फैसला किया।
शिक्षा के क्षेत्र में बनाई बड़ी पहचान
उन्होंने कानून की पढ़ाई गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से की और इसके बाद शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा। वर्ष 2005 में उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की, जो आज देश की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटीज में गिनी जाती है। उनकी सोच थी कि शिक्षा के माध्यम से समाज को बेहतर दिशा दी जाए।
लाखों युवाओं के भविष्य को दी नई दिशा
अशोक मित्तल ने अपने संस्थान के जरिए हजारों नहीं, बल्कि लाखों युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। उनकी यूनिवर्सिटी से पढ़े छात्र आज देश-विदेश में अपनी पहचान बना रहे हैं। इस तरह उन्होंने शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने का सफल प्रयास किया।
राजनीति में भी विकास और शिक्षा पर फोकस
राजनीति में आने के बाद भी उनका फोकस शिक्षा, रोजगार और विकास पर ही रहा। आम आदमी पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने पंजाब में सक्रिय भूमिका निभाई और 2022 में राज्यसभा पहुंचे। संसद में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी और एक शांत व व्यावहारिक नेता की छवि बनाई।
नई राजनीति का बदलता चेहरा
अशोक मित्तल की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि अब राजनीति में सिर्फ पारंपरिक नेता ही नहीं, बल्कि शिक्षा और प्रोफेशनल क्षेत्र से जुड़े लोग भी तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि समाज के किसी भी क्षेत्र में काम करके सफलता हासिल की जा सकती है और वही अनुभव राजनीति में भी काम आता है।

