वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 40 से अधिक पेट्रोकेमिकल कच्चे माल और इंटरमीडिएट उत्पादों पर आयात शुल्क को शून्य कर दिया गया है। इनमें अमोनियम नाइट्रेट, मेथनॉल, फिनॉल, पीवीसी और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे महत्वपूर्ण रसायन शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य वैश्विक संकट के चलते बढ़ती लागत के दबाव को कम करना और उद्योगों को स्थिरता प्रदान करना है।
उर्वरक कंपनियों के लिए बड़ा सहारा
इस फैसले से उर्वरक कंपनियों को सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है। अमोनियम नाइट्रेट खाद निर्माण का एक जरूरी घटक है, और इस पर शुल्क हटने से उत्पादन लागत घटेगी। साथ ही, इस पर लगने वाला कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) भी समाप्त कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को अतिरिक्त राहत मिलेगी।
आयात शुल्क हटने से कच्चा माल सस्ता होगा, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और आपूर्ति की स्थिति सुधरेगी। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई बुनियादी रसायनों जैसे मेथनॉल, एसीटिक एसिड, फिनॉल, टोल्युइन और अमोनिया का उपयोग व्यापक स्तर पर होता है।
कई सेक्टर को मिलेगा फायदा
इस कदम का लाभ सिर्फ उर्वरक उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक कच्चे माल की लागत घटने से पैकेजिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तु उद्योग को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, इन रसायनों का उपयोग पीवीसी पाइप, पेंट, कोटिंग, इंसुलेशन, दवा निर्माण और चिकित्सा उपकरणों में भी होता है।
वाहन उद्योग में प्लास्टिक पार्ट्स और सीट फोम बनाने में भी इनका इस्तेमाल होता है, जिससे वहां भी लागत कम होने की संभावना है। कुल मिलाकर, सरकार का यह निर्णय मौजूदा वैश्विक संकट के बीच उद्योगों के लिए एक बड़े राहत पैकेज के रूप में देखा जा रहा है, जो आपूर्ति को स्थिर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है।