गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद के मुद्दे पर बोलते हुए सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के लगातार प्रयासों के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद अब लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि वहां गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए स्कूल खोलने और राशन की दुकानों का विस्तार करने जैसे कई कदम उठाए गए, जिससे हालात में बड़ा बदलाव आया है।
अमित शाह ने कहा कि पहले बस्तर जैसे इलाकों में नक्सलवाद के कारण विकास की पहुंच सीमित थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में गरीबों को आवास, रसोई गैस, स्वच्छ पेयजल, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं दी गईं, लेकिन बस्तर जैसे क्षेत्र पहले इससे वंचित रह गए थे क्योंकि वहां नक्सलवाद का प्रभाव अधिक था। अब जब यह प्रभाव कम हुआ है, तो विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
विपक्ष पर साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंच पाईं। शाह ने कहा कि दशकों तक इन इलाकों में न तो पर्याप्त स्कूल बने, न ही पानी, बैंकिंग या अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचाई गईं। उन्होंने विपक्ष को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि पहले अपनी नीतियों और कार्यकाल पर नजर डालनी चाहिए।
नक्सलवाद पर सख्त रुख
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा सरकार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भी हथियार उठाएगा, उसे कानून के तहत जवाब दिया जाएगा। शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पहले भी नक्सलवाद को देश की बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती माना गया था, लेकिन उस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सरकार का लक्ष्य देश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त करना है और इसके लिए सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है।