HomeBreaking NewsIGNOU के हेल्थकेयर कोर्स पर बवाल, UGC के नियमों ने बढ़ाई स्टूडेंट्स...

IGNOU के हेल्थकेयर कोर्स पर बवाल, UGC के नियमों ने बढ़ाई स्टूडेंट्स की टेंशन

IGNOU Healthcare Course: अगर आप इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से पढ़ाई कर रहे हैं या एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। खासकर हेल्थकेयर और साइकोलॉजी जैसे कोर्स करने वाले छात्रों के बीच इन दिनों चिंता बढ़ गई है। University Grants Commission (UGC) के नियमों के चलते इन कोर्स की वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ उन कोर्स से जुड़ी है जिनमें प्रैक्टिकल या क्लीनिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विषयों में केवल किताबों के जरिए पढ़ाई पर्याप्त नहीं होती। इसके बावजूद IGNOU इन कोर्स में डिस्टेंस मोड के तहत एडमिशन दे रहा है, जिससे छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है कि उनकी डिग्री आगे मान्य होगी या नहीं।

साइकोलॉजी कोर्स पर क्यों ज्यादा चर्चा

इस साल IGNOU ने एमए साइकोलॉजी कोर्स में बड़ी संख्या में आवेदन मांगे हैं और कई छात्रों ने दाखिला भी ले लिया है। लेकिन साइकोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्लीनिकल ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल अनुभव बेहद जरूरी होता है। यदि यह ट्रेनिंग सही तरीके से नहीं मिलती, तो भविष्य में नौकरी और प्रोफेशनल लाइसेंस हासिल करने में दिक्कत आ सकती है।

 क्या कहते हैं UGC के नियम

UGC के अनुसार, जिन कोर्स में प्रैक्टिकल या क्लीनिकल ट्रेनिंग अनिवार्य है, उन्हें केवल नियमित (रेगुलर) मोड में ही कराया जाना चाहिए। ऐसे कोर्स को पूरी तरह ऑनलाइन या डिस्टेंस मोड में करना मान्य नहीं माना जाता। यही वजह है कि अब इन कोर्स की वैधता को लेकर बहस तेज हो गई है।

NET और JRF पर पड़ सकता है असर

इस विवाद का असर उन छात्रों पर भी पड़ सकता है जो आगे चलकर NET या JRF जैसी परीक्षाएं देना चाहते हैं। इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए मान्यता प्राप्त डिग्री जरूरी होती है। अगर कोर्स को मान्यता नहीं मिलती, तो छात्रों का टीचिंग या रिसर्च का सपना अधूरा रह सकता है।

छात्रों में बढ़ी चिंता और कन्फ्यूजन

पूरे मामले के बाद छात्रों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। जो छात्र पहले से पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अपने समय और पैसे को लेकर चिंता सता रही है। वहीं नए छात्र अब एडमिशन लेने से पहले ज्यादा सतर्क हो गए हैं। कुल मिलाकर स्थिति अनिश्चितता और भ्रम से भरी हुई है।

IGNOU की ओर से क्या कहा गया?

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी अपने प्रॉस्पेक्टस में कोर्स से जुड़ी शर्तों और जरूरी जानकारी का उल्लेख करता है। हालांकि, कई बार छात्र इन बातों को नजरअंदाज कर देते हैं या पूरी जानकारी नहीं ले पाते, जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Read More: 

अब मैसेज नहीं होंगे मिस! WhatsApp का ‘रिमाइंड मी’ फीचर करेगा याद दिलाने का काम, तय समय पर मिलेगा नोटिफिकेशन

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments