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हवा में लटका खंबा, बना है एक पैर का निशान… 500 साल से नहीं मिल रहा इस रहस्यमयी मंदिर का राज, वैज्ञानिक भी कंफ्यूज

Lepakshi Temple Mystery: भारत के प्राचीन मंदिरों में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो आज भी विज्ञान की समझ से परे हैं। ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर है, जिसे ‘हैंगिंग पिलर टेंपल’ के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका एक ऐसा खंभा है, जो जमीन से जुड़ा नहीं है और हवा में लटका हुआ दिखाई देता है।

हवा में लटका रहस्यमयी खंभा

मंदिर में कुल 70 खंभे हैं, जिनमें से एक खंभा जमीन से करीब आधा इंच ऊपर उठा हुआ है। यह स्तंभ बिना किसी सहारे के खड़ा है, जिसे ‘आकाश स्तंभ’ कहा जाता है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में मान्यता है कि इसके नीचे से कपड़ा या कोई वस्तु निकालने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु इस अनोखे खंभे के नीचे से कपड़ा निकालने की कोशिश करते हैं।

ब्रिटिश इंजीनियर से जुड़ी कहानी

स्थानीय कथाओं के अनुसार, यह खंभा पहले जमीन से जुड़ा हुआ था। बताया जाता है कि एक ब्रिटिश इंजीनियर ने मंदिर की संरचना को समझने के लिए इस स्तंभ को हिलाने की कोशिश की, जिसके बाद यह खंभा जमीन से थोड़ा ऊपर उठ गया और तब से उसी स्थिति में है। हालांकि इस घटना का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन यह कहानी आज भी लोगों के बीच प्रचलित है।

भगवान वीरभद्र को समर्पित मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप वीरभद्र को समर्पित है। मान्यता है कि वीरभद्र का प्राकट्य दक्ष के यज्ञ के बाद हुआ था। मंदिर परिसर में भगवान शिव के अन्य रूप जैसे अर्धनारीश्वर, दक्षिणामूर्ति, कंकाल मूर्ति और त्रिपुरांतकेश्वर की भी मूर्तियां स्थापित हैं। यहां माता भद्रकाली की भी पूजा की जाती है।

कछुए के आकार में बना मंदिर

कुर्मासेलम पहाड़ियों पर बना यह मंदिर कछुए के आकार में निर्मित है, जो इसे और भी विशेष बनाता है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 16वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य के दो भाइयों, विरुपन्ना और विरन्ना ने कराया था। वहीं, पौराणिक मान्यताओं में इसे ऋषि अगस्त्य से भी जोड़ा जाता है।

रामायण से जुड़ा पौराणिक महत्व

इस मंदिर का संबंध रामायण से भी बताया जाता है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां जटायु रावण से युद्ध के बाद घायल होकर गिरे थे और भगवान राम को सीता हरण की जानकारी दी थी। मंदिर परिसर में एक विशाल पैर का निशान भी मौजूद है, जिसे त्रेता युग से जोड़ा जाता है। कुछ लोग इसे भगवान राम का पदचिह्न मानते हैं, तो कुछ इसे माता सीता का। लेपाक्षी मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला, रहस्यमयी खंभे और पौराणिक मान्यताओं के कारण आज भी श्रद्धालुओं और वैज्ञानिकों दोनों के लिए आकर्षण और शोध का विषय बना हुआ है।

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