ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने साफ कहा कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, और इसका समाधान युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय वैश्विक अस्थिरता का दौर है।
पश्चिम एशिया में लगातार हो रहे हमले न केवल भारत बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कई देश इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बचते हैं, लेकिन भारत ने हमेशा स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाया है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि किसी भी युद्ध का स्थायी समाधान हथियारों से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकल सकता है।
‘संघर्षों का असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता’
रक्षा मंत्री ने आगे आगाह किया कि इस तरह के संघर्षों का असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है, जिससे भारत सहित कई देशों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत की नीतियों पर जताया भरोसा
हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि अब तक भारत ने अपनी नीतियों और नेतृत्व की क्षमता के बल पर खुद को बड़े संकट से बचाए रखा है। फिर भी उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, इसलिए भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ जा सकता। अंत में उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे इस कठिन वैश्विक दौर में सरकार के प्रयासों का समर्थन करें, ताकि भारत मजबूती के साथ किसी भी संभावित चुनौती का सामना कर सके।