अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से 2 मिलियन डॉलर (करीब 20 करोड़ रुपये) तक का टोल वसूल रहा है। बताया जा रहा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जबकि अब तक इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह मुफ्त रही है। हालांकि, इस मामले पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
सुरक्षित गलियारे के नाम पर वसूली
एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक “सुरक्षित गलियारा” तैयार किया है, जो लारक द्वीप के पास स्थित है। इस गलियारे से अब तक 9 जहाजों को निकाला गया है। इनमें से एक जहाज ने पुष्टि की है कि उससे 2 मिलियन डॉलर का शुल्क लिया गया।
भारत, चीन और पाकिस्तान के जहाज शामिल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस गलियारे से गुजरने वाले जहाजों में भारत, चीन, पाकिस्तान और मलेशिया के जहाज शामिल हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस देश के कितने जहाज इस प्रक्रिया से गुजरे। सूत्रों का कहना है कि यह गलियारा कूटनीतिक पहल के तहत तैयार किया गया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनके देश ने केवल मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। वहीं, अमेरिकी प्रयासों का भी जिक्र किया गया है, जिनका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के प्रभाव को कम करना बताया जा रहा है।
टोल वसूली के पीछे रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान की दोहरी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। एक ओर वह आर्थिक दबाव को कम करने के लिए नए राजस्व स्रोत तलाश रहा है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश देना चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसका नियंत्रण कायम है।
वैश्विक व्यापार के लिए अहम मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का बदलाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।
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