खाड़ी क्षेत्र में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। समुद्री मार्गों में बाधा के कारण कई देशों में गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे भारत के कई शहरों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कमी देखने को मिली। लोग सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहे। लेकिन अब राहत की खबर आई है।
LPG से भरा जहाज ‘शिवालिक’ कतर से होते हुए भारत पहुंच गया है। ईरान के जवाबी हमले के कारण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदी लगी थी, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसी बीच भारतीय तिरंगे वाले दो एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ शनिवार को करीब 92,712 टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकले।
शिवालिक में है कितनी LPG ?
‘शिवालिक’ में लगभग 54,000 टन LPG भरी हुई है और यह जहाज आज शाम 5 बजे गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका है। वहीं ‘नंदा देवी’ कल, 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगी। ‘शिवालिक’ उन जहाजों में से एक था जो खाड़ी में युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिमी जलडमरूमध्य में फंसा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘शिवालिक’ जहाज कतर के रास लफान पोर्ट से गैस भरने के बाद 7 मार्च को रवाना हुआ था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना जहाज के लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि वहां ईरान ने रूट पर पाबंदी लगा दी थी। जहाज ने शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच खाड़ी का पार किया और सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ा। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व वाला ‘शिवालिक’ एक LPG टैंकर है, जिसकी लंबाई 225.28 मीटर और चौड़ाई 36.6 मीटर है। इसकी गति 8.1 नॉट (लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे) है।
सुरक्षित हैं भारतीय जहाज और नाविक
सरकार ने कहा कि इस संघर्षपूर्ण समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे सभी भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में तैनात 22 भारतीय ध्वजवाहक जहाजों पर 611 नाविक सुरक्षित हैं और उनके परिचालन पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारत अपनी लगभग 88% कच्चे तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी की जरूरतें आयात पर निर्भर करता है।
ईरान में 28 फरवरी से शुरू हुई जंग से पहले भारत अपने कच्चे तेल का आधा हिस्सा और गैस तथा एलपीजी का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और यूएई से आयात करता था। इस बार ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जहाजों के सुरक्षित आगमन से घरेलू गैस की आपूर्ति में राहत मिलेगी और लोगों को सिलेंडर की लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी कम होगी।