पंजाब विधानसभा का शून्य काल एक बार फिर विवाद का केंद्र बन गया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में कांग्रेस के विधायक सुखपाल सिंह खैरा द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए एक बयान को पढ़कर सुनाया। खैरा ने अपने बयान में कहा था कि “1000 रुपये लेकर महिलाएं कौन से बहादुर लोगों को पैदा कर देंगी।” इस पर चीमा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बयान अनुसूचित जाति की महिलाओं और बेटियों का अपमान करने वाला है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं की नियमित बयानबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि कभी किसी को ‘काला’ कह देते हैं और कभी किसी को तुच्छ करार देते हैं। उनका कहना था कि इस तरह की मानसिकता वाले नेताओं को मानसिक स्वास्थ्य लाभ की जरूरत है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि उन्होंने इस बयान को देखा नहीं है, लेकिन यदि ऐसा कहा गया है तो खैहरा को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए और मामले को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
सदन में शब्दों को लेकर सख्ती का रुख
हरपाल चीमा ने यह भी कहा कि जिन कांग्रेस नेताओं के प्रति उन्होंने आपत्ति जताई, वे वर्तमान में सदन का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने कई बार अपनी बात स्पष्ट कर दी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह जैसे नेताओं को सम्मानजनक पद दिए हैं, इसलिए उनके प्रति किसी प्रकार की अनादर की बात को बार-बार उठाना उचित नहीं है।
माफी के बावजूद विवाद जारी
प्रताप सिंह बाजवा की माफी के बावजूद मामला शांत नहीं हुआ। आम आदमी पार्टी की विधायिका इंद्रजीत मान और सरबजीत कौर ने अपनी सीटों पर खड़े होकर खैहरा के बयान का विरोध किया। उन्होंने कहा कि माफी देने के बावजूद यह बयान क्षम्य नहीं है और इसे जनता तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही उन्होंने खैरा के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।