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मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में सऊदी अरब को भी निशाना बनाया। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जिसके बाद उसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
क्या था सऊदी-पाक डिफेंस एग्रीमेंट?
सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक रणनीतिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था। इसे अनौपचारिक रूप से ‘इस्लामिक NATO’ जैसा ढांचा बताया गया, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा।
ऐसे में जब ईरान ने सऊदी को निशाना बनाया, तो उम्मीद थी कि पाकिस्तानी सेना जिसे जनरल असीम मुनीर लीड कर रहे हैं कोई सख्त रुख अपनाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पाकिस्तान ने क्यों नहीं किया जंग का ऐलान?
इस्लामाबाद ने सैन्य कार्रवाई के बजाय “एकजुटता” और “संयम” चुना। इसकी कई वजहें हैं –
1. ईरान के साथ रिश्ता
पाकिस्तान और ईरान लंबी और संवेदनशील सीमा साझा करते हैं। दोनों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते हैं। हाल के वर्षों में हाई-लेवल विजिट और क्षेत्रीय सहयोग भी बढ़ा है।
2. अंदरूनी दबाव
कराची, लाहौर और अन्य शहरों में अमेरिका-इजरायल के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए हैं। ऐसे माहौल में ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई पाकिस्तान के भीतर सांप्रदायिक तनाव भड़का सकती है।
3. कई मोर्चों पर पहले से दबाव
पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान के साथ तनावपूर्ण है। भारत के साथ रिश्ते भी सामान्य नहीं हैं। ऐसे में ईरान के खिलाफ नया सैन्य मोर्चा खोलना जोखिम भरा कदम होगा।
पाकिस्तान का मौजूदा रुख
पाकिस्तान ने किसी पक्ष का खुला समर्थन नहीं किया है। इस्लामाबाद संयुक्त राष्ट्र में चीन और रूस के साथ मिलकर तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की मांग वाला प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है।
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