Tuesday, February 10, 2026
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Uttarakhand : उत्तराखंड के जंगलों में लगी भीषण आग, खेतों तक पहुंचीं लपटें…सेंटिनल-2 ने अंतरिक्ष से भेजी डराने वाली तस्वीर

उत्तराखंड के देहरादून जनपद के पर्वतीय क्षेत्र त्यूणी में जंगल की आग ने भयावह रूप ले लिया। हरटाड़ गांव के समीप वन क्षेत्र में भड़की आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते खेतों व बागानों तक पहुंच गई। आग की चपेट में आते ही सेब के बगीचे जलने लगे, जिससे सैकड़ों एप्पल के पेड़ राख में तब्दील हो गए। इस दौरान एक दो मंजिला छानी (कच्चा मकान) भी आग की जद में आ गई, जो पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। इस घटना से स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

आग की तीव्रता से मची अफरा-तफरी

आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही जंगल की आग कृषि भूमि और बागानों की ओर बढ़ी, ग्रामीणों में दहशत फैल गई। लोग अपनी फसलें और जीवनभर की मेहनत को बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ते नजर आए। सेब के बागानों से उठता काला धुआं और आसमान छूती लपटें दूर-दूर से दिखाई दे रही थीं, जिससे हालात बेहद डरावने हो गए थे।

ग्रामीणों ने की आग बुझाने की कोशिश

ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं और दुर्गम पहाड़ी भू-भाग के कारण आग पर नियंत्रण पाना आसान नहीं था। कई घंटों की कठिन मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका, मगर तब तक सैकड़ों पेड़, खेत और अन्य कृषि संपत्तियां जलकर नष्ट हो चुकी थीं। आग की चपेट में आई दो मंजिला छानी भी पूरी तरह खाक हो गई, जिससे किसानों की वर्षों की मेहनत कुछ ही पलों में मिट्टी में मिल गई।

सेंटिनल-2 सैटेलाइट ने तस्वीरों में कैद किया मंजर

इस भीषण जंगल की आग को यूरोप के सेंटिनल-2 सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से भी कैद किया है। इसमें एक अत्याधुनिक डिजिटल कैमरा लगाया गया है, जो सूर्य की उन किरणों को रिकॉर्ड करता है जो धरती और वातावरण से परावर्तित होकर वापस जाती हैं। यह सैटेलाइट मिशन अपने दस वर्ष पूरे कर चुका है और धरती तथा समुद्री तटों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के लिए जाना जाता है।

इन तस्वीरों का उपयोग खेती, वन संरक्षण और जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की यह तस्वीर 9 दिसंबर 2025 को ली गई थी। हालांकि जनवरी 2026 में भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है और नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के कई हिस्सों में अब भी आग की घटनाएं सामने आ रही हैं।

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