Tuesday, March 3, 2026
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UP News : 11,350 ग्राम पंचायतों में खुलेंगी डिजिटल लाइब्रेरी, प्रति लाइब्रेरी 4 लाख का बजट मंजूर

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उत्तर प्रदेश के गांवों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए अब बड़े सपनों को साकार करने का रास्ता और आसान होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई और दूरदर्शी पहल को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जाएंगी, ताकि गांव के छात्र बिना शहर गए ही UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकें।

हर गांव में बनेगा आधुनिक अध्ययन केंद्र

राज्य सरकार हर डिजिटल लाइब्रेरी पर लगभग 4 लाख रुपये खर्च कर रही है। इस बजट को इस तरह से इस्तेमाल किया जाएगा-

  • 2 लाख रुपये प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक पुस्तकों की खरीद पर
  • 1.30 लाख रुपये कंप्यूटर, तेज इंटरनेट कनेक्शन और आईटी सुविधाओं के लिए
  • 70 हजार रुपये आरामदायक बैठने की व्यवस्था और आधुनिक फर्नीचर पर

इन लाइब्रेरी केंद्रों में केवल किताबें ही नहीं, बल्कि ई-बुक्स, वीडियो लेक्चर, ऑडियो सामग्री और 20 हजार से ज्यादा डिजिटल लर्निंग रिसोर्स भी छात्रों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

संचालन और निगरानी की व्यवस्था

पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह के मुताबिक, इस योजना को चरणों में लागू किया जा रहा है। डिजिटल लाइब्रेरी का रोजमर्रा का संचालन ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की जिम्मेदारी होगा, जबकि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसकी नियमित मॉनिटरिंग करेंगे, ताकि संसाधनों का सही और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

35 जिलों में प्रक्रिया पूरी

योजना के पहले चरण में लखनऊ, प्रयागराज, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश के 35 जिलों में पुस्तकों के चयन का काम पूरा कर लिया गया है। सरकार का मानना है कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे ग्रामीण युवा भी तकनीकी और शैक्षणिक संसाधनों में शहरी छात्रों के बराबर खड़े हो सकेंगे।

इन जिलों में चयन कार्य पूरा

अमरोहा, आजमगढ़, बलिया, बरेली, बिजनौर, फतेहपुर, गाजियाबाद, कानपुर देहात, लखनऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, सीतापुर सहित कुल 35 जनपदों में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए पुस्तकों का चयन पूरा किया जा चुका है। कुल मिलाकर, यह योजना न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करेगी, बल्कि गांव के युवाओं को बड़े मंच तक पहुंचने का आत्मविश्वास भी देगी।

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