Tuesday, February 10, 2026
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UP News : बागपत बना कैंसर का गढ़, जहरीले पानी से गई करीब 70 लोगों की जान…

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का गंगनौली गांव बीते एक दशक से जहरीले पानी की मार झेल रहा है। यहां दूषित पेयजल के चलते अब तक 70 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। गांव के पास बहने वाली कृष्णा नदी में शुगर मिलों और अन्य औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त अपशिष्ट गिराए जाने से भूजल पूरी तरह जहरीला हो चुका है।

हालात इतने गंभीर हैं कि कभी पीने लायक रहा पानी अब पीला, बदबूदार और जानलेवा बन गया है। करीब 7 हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी स्वच्छ पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहा है।

NGT के आदेश कागज़ों तक सीमित

दूषित पानी से फैलती बीमारियों ने जब गांव में तबाही मचानी शुरू की, तब ग्रामीणों ने 2010 में प्रशासन से गुहार लगाई। समाधान न मिलने पर मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंचा. एनजीटी ने साफ पानी उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए, जिसके बाद प्रशासन ने 2015 में गांव के सभी हैंडपंप सील कर दिए।

विकल्प के तौर पर एक पानी की टंकी तो लगा दी गई, लेकिन वह व्यवस्था भी पूरी तरह नाकाम साबित हुई. जगह-जगह टूटी पाइपलाइन के कारण शुद्ध पानी घरों तक पहुंच ही नहीं पाता। नतीजा यह है कि ग्रामीण मजबूरी में निजी सबमर्सिबल से निकल रहे जहरीले पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

चेक डैम बने जहर का भंडार

ग्रामीणों का कहना है कि कृष्णा नदी पर बनाए गए चेक डैम स्थिति को और भयावह बना रहे हैं। भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए ये डैम अब जहरीले पानी के ठहराव स्थल बन चुके हैं. फैक्ट्रियों से निकलने वाला रासायनिक कचरा इन डैमों में लंबे समय तक जमा रहता है और धीरे-धीरे जमीन के अंदर रिसकर भूजल को और अधिक प्रदूषित कर रहा है। गांव की प्रधान के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला, ज़मीनी कार्रवाई नहीं।

बीमारी, मौत ने मचाया तांडव

गंगनौली में आज भी लीवर, मुंह और पेट के कैंसर से जूझ रहे कई मरीज मौजूद हैं। सिर्फ बीते एक साल में ही लगभग 20 लोगों की जान जा चुकी है। इलाज के लिए ग्रामीणों को दिल्ली के एम्स और सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. टी. लाल इन मौतों के लिए दूषित पानी को जिम्मेदार मानने से इंकार करते हैं। उनका दावा है कि जांच में पानी और कैंसर के बीच सीधा संबंध नहीं पाया गया। लेकिन गांव की गलियों में हर घर में मौजूद बीमार लोग प्रशासन के इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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