Thursday, February 12, 2026
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यूपी सरकार का चौंकाने वाला फैसला! स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव करते हुए 15 चिकित्सा अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। यह निर्णय प्रशासनिक सुचारूता और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए लिया गया है। तबादला सूची में जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में नई तैनाती दी गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए बड़ा कदम

सरकार द्वारा किए गए इन तबादलों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना और सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करना है। स्थानांतरित अधिकारियों को विभिन्न जिला अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया गया है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

तबादले की लिस्ट के मुताबिक, डॉ. नेम सिंह को संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, लखनऊ से मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय, प्रयागराज भेजा गया है। इसी तरह, डॉ. रास बिहारी शरन को चंदौली से लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सालय, वाराणसी में तैनात किया गया है।

किन अधिकारियों को कहां भेजा गया?

सरकार द्वारा जारी तबादला सूची के अनुसार, प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:

  • डॉ. अशोक कुमार (मथुरा) को कानपुर नगर भेजा गया।
  • डॉ. ब्रम्ह सिंह (मुरादाबाद) को मुरादाबाद में ही तैनाती दी गई।
  • डॉ. वंदना श्रीवास्तव (चित्रकूट) को जौनपुर स्थानांतरित किया गया।
  • डॉ. अनिल कुमार (महोबा) को सीतापुर भेजा गया।
  • डॉ. विनय कुमार सिंह (बुलंदशहर) को हापुड़ में तैनाती मिली।
  • डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता (बिजनौर) को मुरादाबाद भेजा गया।
  • डॉ. अवधेश कुमार जाटव (कन्नौज) को जिला महिला चिकित्सालय, कन्नौज में नियुक्त किया गया।

इसके अलावा, अन्य चिकित्सा अधिकारियों को भी प्रदेश के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में स्थानांतरित किया गया है।

तबादलों से स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा लाभ

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार होगा और मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से जनहित में लिया गया है और आगे भी जरूरत के हिसाब से सुधार जारी रहेंगे।

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