Toshakhana Auction: कभी विदेश यात्राओं के दौरान भारत सरकार को मिले दुर्लभ और कीमती उपहार केवल सरकारी रिकॉर्ड और खजाने तक ही सीमित रहते थे। आम लोग इनके बारे में केवल सुन सकते थे, लेकिन इन्हें खरीदने का अवसर नहीं मिलता था। अब पहली बार विदेश मंत्रालय (MEA) ने तोशाखाना की ई-नीलामी आम नागरिकों के लिए शुरू कर दी है। यदि किसी को दुर्लभ और ऐतिहासिक संग्रह रखने का शौक है और वह तय कीमत चुकाकर इन उपहारों पर ऑनलाइन बोली लगा सकता है। नीलामी में लग्जरी घड़ियों, सोने के आभूषण, चांदी के सजावटी सामान और विदेशी स्मृति-चिह्न शामिल किए गए हैं। ये केवल महंगी चीजें नहीं, बल्कि भारत के कूटनीतिक इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की यादगार निशानियां भी हैं।
ऑनलाइन पोर्टल से घर बैठे लगा सकेंगे बोली
विदेश मंत्रालय ने इस प्रोसेस के लिए एक ऑनलाइन ई-ऑक्शन पोर्टल लॉन्च किया है। संशोधित Toshakhana Rules, 2024 के तहत शुरू की गई इस पहल में कोई भी काबिल व्यक्ति घर बैठे बोली लगा सकता है। इस बार करीब 300 वस्तुएं नीलामी के लिए रखी गई हैं, जिनकी शुरुआती कीमत 2,385 रुपये से लेकर लगभग 17 लाख रुपये तक तय की गई है। सबसे ज्यादा चर्चा दो Rolex Yacht-Master घड़ियों की हो रही है, जिनकी तय कीमत करीब 16.5 लाख रुपए प्रति घड़ी रखी गई है। वहीं कुवैत के Al Arbash ब्रांड का गोल्ड ज्वेलरी सेट, जिसमें नेकलेस, ब्रेसलेट और ईयररिंग्स शामिल हैं, उसकी शुरुआती कीमत 9.5 लाख रुपये तय की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस गोल्ड सेट पर फिलहाल कोई बोली नहीं लगी थी।
चांदी के दुर्लभ सामान से लेकर MacBook Pro तक खरीदें
नीलामी में केवल महंगी घड़ियां और ज्वेलरी ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ उपहार भी शामिल किए गए हैं। इनमें ओमान की पारंपरिक चांदी की कटार, लंदन में बना सिल्वर टी-सेट, चांदी के सजावटी बॉक्स, स्विट्जरलैंड के Argor Heraeus ब्रांड का 20 ग्राम गोल्ड बिस्किट वाला डेकोरेटिव बॉक्स और Apple MacBook Pro जैसे गिफ्ट शामिल हैं। एक एंटीक सिल्वर बॉक्स, जिसे कभी प्रीमियम सिगार या सिगरेट रखने के लिए डिजाइन किया गया था, सबसे फेमस चीजों में शामिल है। इसकी शुरुआती कीमत 12,030 रुपये रखी गई थी और इस पर कई बोलियां लग चुकी हैं। वहीं गोल्ड प्लेटेड ड्रैगन वाले डेकोरेटिव सिल्वर बॉक्स पर भी लगातार बोली बढ़ रही है।

30 जून तक चलेगी नीलामी
यह ई-नीलामी 30 जून तक जारी रहेगी। सफल बोली लगाने वालों को खरीदा गया सामान बिना किसी अतिरिक्त डिलीवरी शुल्क के भेजा जाएगा। विदेश मंत्रालय के स्थापना प्रभाग के अंतर्गत तोशाखाना सेक्शन पूरी प्रक्रिया का संचालन कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार हरेक वस्तु का मूल्य विशेषज्ञ समिति ने तय किया है और आधार मूल्य में मूल्यांकन के साथ पैकिंग तथा डिलीवरी की लागत भी जोड़ी गई है। नीलामी से प्राप्त पूरी राशि भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा होगी।
क्या है तोशाखाना और कहां से आते हैं ये उपहार?
तोशाखाना भारत सरकार का आधिकारिक संग्रह है, जहां विदेशी सरकारों, राष्ट्राध्यक्षों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सरकारी अधिकारियों और प्रतिनिधियों को भारत या विदेश यात्राओं के दौरान दिए गए उपहार सुरक्षित रखे जाते हैं। इससे पहले वर्ष 1983 में हुई नीलामी केवल विदेश मंत्रालय के कर्मचारियों तक सीमित थी। पहली बार आम नागरिकों को इसमें भाग लेने का अवसर मिला है। फिलहाल इस नीलामी में विदेश सचिव और उनसे नीचे के अधिकारियों को मिले उपहार शामिल किए गए हैं। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि भविष्य के चरणों में विदेश मंत्रियों को मिले चुनिंदा उपहारों को भी नीलामी का हिस्सा बनाया जा सकता है।
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