वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को आज सुप्रीम कोर्ट से जबरदस्त झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने ट्रंप सरकार द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क (Tariffs) को गैरकानूनी करार देते हुए तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
फैसले की मुख्य बातें:
अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया। टैरिफ लगाना संसद (Congress) का अधिकार है, न कि राष्ट्रपति का।
6-3 का बहुमत: सुप्रीम कोर्ट के जजों ने 6-3 के अंतर से यह फैसला सुनाया, जिसमें रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों गुटों के जजों ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर सवाल उठाए।
अरबों डॉलर का रिफंड: इस फैसले के बाद अब अमेरिकी सरकार को उन आयातकों को लगभग 150 बिलियन डॉलर (करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़ सकते हैं, जिन्होंने अब तक यह टैक्स चुकाया है।
भारत पर असर:
भारत के लिए यह खबर किसी बड़ी जीत से कम नहीं है। ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 10% से 50% तक का भारी टैरिफ लगाया था, विशेषकर रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% का दंडात्मक शुल्क भी थोपा गया था।
निर्यात को मिलेगी रफ्तार: कपड़ा (Textiles), फार्मा और आईटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी।
बाजार में तेजी: विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय शेयर बाजार (Nifty/Sensex) में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
ट्रंप की चेतावनी:
इस फैसले से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि अगर टैरिफ रद्द हुए तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था “अराजकता” में फंस जाएगी और हजारों अरब डॉलर वापस करना उनके लिए असंभव होगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन अब 1962 के ट्रेड एक्ट जैसे अन्य कानूनी रास्तों के जरिए दोबारा टैरिफ लगाने की कोशिश कर सकता है।
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