Thursday, February 19, 2026
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संभल में मिला शिव मंदिर, जानें कितना है पुराना, क्यों 46 साल से था बंद?

उत्तर प्रदेश के संभल में 46 साल से बंद पड़े शिव मंदिर को प्रशासन ने खोल दिया है। अधिकारियों के मुताबिक अतिक्रमण की सूचना मिलने पर जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो इस प्राचीन मंदिर का पता चला। पुलिसकर्मियों ने मंदिर की सफाई की। मंदिर में शिवलिंग के अलावा हनुमान जी की मूर्ति मिली है। इसके अलावा यहां एक प्राचीन कुआं मिला है, जिसकी खुदाई में तीन अन्य मूर्तियां मिली हैं।

यह कार्तिक शंकर मंदिर संभल के खग्गू सराय इलाके में है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना बताया जाता है। यह इलाका पहले हिंदू बहुल था। 82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी उस समय को याद करते हुए कहते हैं कि कार्तिक शंकर मंदिर यहां के हिंदुओं की आस्था का केंद्र था। लेकिन 1978 के दंगों के बाद हिंदू परिवार ने यहां पूजा करना बंद कर दिया।

हिंदुओं ने क्यों किया पलायन?

विष्णु शरण रस्तोगी (82 वर्षीय) ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने यह मंदिर बनवाया था। इसके पास एक पीपल का पेड़ था और एक कुआं भी था। सुबह-शाम लोग मंदिर आते थे और कुएं के पास कीर्तन होता था। 1978 में यहां दंगा हुआ और हिंदू यहां से पलायन कर गए। चारों तरफ मुस्लिम आबादी थी, इसलिए डर के कारण वे यहां से चले गए। विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि इस इलाके में 40 से 42 हिंदू परिवार रहते थे और थोड़ी दूरी पर मुस्लिम परिवार रहते थे। सभी में काफी भाईचारा था। मंदिर में सभी धार्मिक परंपराएं निभाई जाती थीं। 2005 में हमारे परिवार का आखिरी मकान वहां बिक गया। मंदिर के चारों तरफ 4 फीट का परिक्रमा पथ था विष्णु शरण के मुताबिक, मंदिर में पूजा-आरती करने वाला कोई नहीं बचा। हमने अपने मकान भी मुस्लिम परिवार को बेच दिए। लोगों ने मंदिर के ऊपर बने छज्जे हटा दिए थे।

मंदिर के चारों तरफ 4 फीट का परिक्रमा पथ था

लेकिन सामने के हिस्से को छोड़कर बाकी तीनों तरफ से अतिक्रमण हो गया था। मंदिर पर लगा ताला हमारे परिवार का था। लेकिन, इसे कभी खोला नहीं गया और न ही इसमें कोई पूजा की गई। मैंने 40 साल पहले मंदिर में पूजा करने के लिए एक पुजारी की व्यवस्था की थी, लेकिन पुजारी की हिम्मत नहीं हुई कि वह वहां जाए। वह दो-तीन दिन के लिए गया, लेकिन उसके बाद उसने वहां जाने से मना कर दिया। विष्णु शरण ने बताया कि अतिक्रमणकारियों ने कुएं को बंद कर दिया और उस पर वाहन पार्क करने के लिए रैंप बना दिया। मंदिर के लिए जमीन हमारे परिवार ने दी थी और यह करीब 300 साल पुराना होगा।

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