पंजाब में नियमित पुलिस महानिदेशक (Punjab DGP) की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वह 10 दिनों के भीतर पात्र IPS अधिकारियों के नाम प्रस्तावित करे, ताकि आयोग की एंपैनलमेंट कमेटी नियमित डीजीपी की नियुक्ति पर विचार कर सके।
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी 2026 के निर्देशों के बाद उठाया गया है। अदालत ने विभिन्न राज्यों में लंबे समय से कार्यवाहक DGP नियुक्त करने पर नाराजगी जताई थी और UPSC को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नियुक्तियां करने को कहा था। पंजाब में जुलाई 2022 से 1992 बैच के IAS अधिकारी गौरव यादव कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
UPSC ने जल्द मांगे गए अधिकारियों के प्रस्ताव
18 फरवरी को राज्य के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में UPSC ने 2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले, 3 जुलाई 2018 के आदेश तथा 5 फरवरी 2026 के ताजा निर्देशानुसार जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने पर जोर दिया है। पंजाब पुलिस इस समय शीर्ष स्तर पर अधिक अधिकारियों की मौजूदगी की स्थिति का सामना कर रही है। राज्य में DGP रैंक के कुल 17 अधिकारी हैं।
वर्तमान में 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी संजीव कालरा सबसे वरिष्ठ हैं, लेकिन 28 फरवरी को सेवानिवृत्ति और UPSC के उस नियम के कारण, जिसके तहत DGP पद के लिए कम से कम छह माह की शेष सेवा आवश्यक होती है, उनकी दावेदारी प्रभावित हो सकती है। वहीं, पंजाब कैडर के वरिष्ठ अधिकारी पराग जैन फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और उनके राज्य में लौटने की संभावना कम मानी जा रही है।
राज्य सरकार करेगी अंतिम चयन
1992 बैच के चार IPS अधिकारी DGP रैंक में हैं-गौरव यादव, शरद सत्य चौहान, हरप्रीत सिंह सिद्धू और कुलदीप सिंह। एंपैनलमेंट कमेटी वरिष्ठता, अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों का पैनल तैयार करेगी। अंतिम चयन का अधिकार राज्य सरकार के पास होगा, जो पैनल में शामिल तीन नामों में से एक को नियमित DGP नियुक्त करेगी।
चयन समिति की संरचना भी स्पष्ट है। इसमें यूपीएससी अध्यक्ष या उनके नामित सदस्य (अध्यक्ष के रूप में), केंद्रीय गृह सचिव या उनके प्रतिनिधि, गृह मंत्रालय द्वारा नामित किसी केंद्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख (जो संबंधित राज्य कैडर से न हो), राज्य के मुख्य सचिव और राज्य के DGP शामिल होते हैं। चूंकि गौरव यादव स्वयं दावेदार हैं, इसलिए वे इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से जुड़े एक मामले में समान परिस्थितियों में समान रैंक के अधिकारी को समिति में शामिल करने की अनुमति दी थी।