भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 10 जून 2026 एक महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज होने जा रही है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। इसके साथ ही वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के लगातार निर्वाचित कार्यकाल को पीछे छोड़ देंगे।
10 जून को बनेगा नया कीर्तिमान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4399 दिन पूरे कर लेंगे। इसके साथ ही वह जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पार कर जाएंगे। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि मोदी का पूरा कार्यकाल सीधे तौर पर लोकसभा चुनावों में मिले जनादेश पर आधारित रहा है। जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री मोदी ने पद संभाला था, लेकिन उस समय भारत में लोकतांत्रिक चुनाव नहीं हुए थे और वह अंतरिम सरकार के प्रमुख थे। भारत के पहले आम चुनाव 1951-52 में हुए। पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952 को हुआ और 13 मई 1952 को नेहरू ने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। इसी तारीख से उनके निर्वाचित कार्यकाल की गणना की जाती है, जो 4398 दिनों तक चला।
मोदी का राजनीतिक सफर
नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जीत हासिल की और लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। लगातार तीन आम चुनावों में जीत दर्ज कर सत्ता में बने रहना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। अभी तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल की सूची में अब तक जवाहरलाल नेहरू शीर्ष पर थे, लेकिन 10 जून को यह रिकॉर्ड टूट जाएगा। हालांकि लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में मोदी नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर कुल समय बिताने के मामले में नेहरू अभी भी आगे हैं। नेहरू 1947 से 1964 तक कुल 16 वर्ष 286 दिन प्रधानमंत्री रहे, जो लगभग 6131 दिनों के बराबर है।
रिकॉर्ड क्यों माना जा रहा है खास?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक सत्ता विरोधी माहौल से बचते हुए लगातार जनसमर्थन बनाए रखना आसान नहीं होता। मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 2014, 2019 और 2024 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की, जिसे उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देखा जाता है।
चुनावी सफलता के प्रमुख आधार
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में लागू की गई कई योजनाओं और बड़े फैसलों ने सरकार की लोकप्रियता बनाए रखने में भूमिका निभाई। इनमें जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन वितरण, डिजिटल गवर्नेंस और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी पहलें शामिल हैं। इसके अलावा अनुच्छेद 370 हटाने, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय विदेश नीति जैसे फैसलों को भी सरकार के समर्थक महत्वपूर्ण कारकों के रूप में देखते हैं।
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