Thursday, February 12, 2026
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G-20 में PM मोदी की बड़ी कूटनीतिक मुलाकातें, कई देशों से सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

22 नवंबर 2025 को, दक्षिण अफ्रीका की जोहानिसबर्ग में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में उन्होंने वैश्विक प्रगति, समृद्धि और रणनीतिक साझेदारी के पुनरुद्घाटन पर बल दिया।

महत्वपूर्ण मुलाकातें और बातचीत

  • ब्रिटेन – प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर
    मोदी ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर से मुलाकात कर कहा कि “इस साल भारत-ब्रिटेन भागीदारी में नई ऊर्जा आई है।” उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग को और आगे ले जाएंगे।

  • मलेशिया – प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम
    मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ “बहुत अच्छी बातचीत” की। उन्होंने कहा कि भारत और मलेशिया साझेदारी को विविध क्षेत्रों में मजबूत करेंगे।

  • फ्रांस – राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
    PM ने फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात को “आनंददायक” बताया और कहा कि विभिन्न मुद्दों पर उनकी बातचीत गहरी और सार्थक रही। मोदी ने यह भी कहा कि “भारत-फ्रांस रिश्ते दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत बने हुए हैं।”

  • दक्षिण कोरिया – राष्ट्रपति ली जे-म्युंग
    यह मोदी और ली जे-म्युंग की दूसरी मुलाकात है इस साल। मोदी ने इसे “हमारी विशेष रणनीतिक भागीदारी में तेज़ी का संकेत” बताया। दोनों ने आर्थिक और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में दृष्टिकोण साझा किया।

  • ब्राज़ील – राष्ट्रपति लुइज इन्नासियो लूला दा सिल्वा
    मोदी ने कहा कि भारत और ब्राज़ील “अपने लोगों के फायदे के लिए” व्यापार और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।

  • संयुक्त राष्ट्र – महासचिव एंतोनियो गुतारेस
    PM मोदी ने गुतारेस के साथ “बहुत सार्थक बातचीत” की। उन्होंने इस मुलाकात को जी-20 मंच पर सहयोग और बहुपक्षीयता के महत्व का प्रतीक बताया।

  • इसके अलावा, मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के PM एंथनी अल्बनीज़ से भी G20 के साइडलाइन्स पर चर्चा की, जिसमें रक्षा, व्यापार और निवेश पर ज़ोर दिया गया।

ग्लोबल विज़न और भारत का उद्देश्य

PM मोदी ने अपने “एक्स” (पहले ट्विटर) पोस्ट में जी-20 नेताओं के साथ साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा:

“हम एक साथ मिलकर वैश्विक प्रगति और समृद्धि के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।”

वे यह संकेत देना चाहते हैं कि भारत न सिर्फ आर्थिक विकास चाहता है, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और बहुपक्षीय सहयोग के मॉडल को बढ़ावा देना चाहता है। वास्तव में, G20 सम्मेलन का विषय भी “सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी (समर्थन, समानता, स्थिरता)” रखा गया है, जो व्यापक वैश्विक चुनौतियों को सामने रखते हुए विकास और साझेदारी की दिशा की ओर इशारा करता है।

अहम संदेश और परिणामी संभावनाएँ

  1. रणनीतिक भागीदारी को मजबूती
    मोदी की इन मुलाकातों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों को सिर्फ आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखता, बल्कि उन्हें राजनीतिक और वैश्विक स्थिरता के लिए अहम मंच मानता है।

  2. वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़
    दक्षिण अफ्रीका में आयोजित यह G20 शिखर सम्मेलन इस बात का प्रतीक है कि भारत और अन्य विकासशील देशों की आवाज़ वैश्विक मंच पर बढ़ रही है। मोदी ने विकास, सहनशीलता और आर्थिक समानता पर जोर देकर यह संदेश दिया कि विकास सिर्फ कुछ देशों का गुण नहीं हो सकता।

  3. बहुपक्षीय संस्थाओं का महत्व
    गुतारेस के साथ वार्ता यह दर्शाती है कि भारत बहुपक्षीय संस्थाओं, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र, को मजबूत करने में विश्वास रखता है और ग्लोबल चुनौतियों (जैसे स्वास्थ्य, जलवायु, वैश्विक असमानता) का हल साझा प्रयासों से खोजने की दिशा में काम करना चाहता है।

  4. दीर्घकालीन सहयोग
    मोदी ने देश-देश साझेदारी को लंबी अवधि के दृष्टिकोण से देखा है – न सिर्फ तात्कालिक हितों के लिए, बल्कि भविष्य में व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्रों में मिलकर काम करने की संभावना को बढ़ाया है।

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