प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Modi) ने मंगलवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके भारत पर संभावित असर को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने इस हालात को देश के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति बहाल करने के पक्ष में रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से वे लगातार इज़राइल, ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और खाड़ी देशों के नेताओं के संपर्क में हैं।
प्रधानमंत्री(PM Modi) ने स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज में फंसे जहाजों और उनमें मौजूद भारतीय चालक दल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, उन्होंने संसद से अपील की कि इस कठिन समय में भारत से दुनिया को शांति और एकता का संदेश जाना चाहिए।
संकट से निपटने की तैयारी
वैश्विक अस्थिरता के असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने तेज़ी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि कोविड काल की तरह ही सात नए ‘एम्पावर्ड ग्रुप’ बनाए गए हैं, जो अलग-अलग अहम क्षेत्रों में रणनीति तैयार करेंगे।
इनमें सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स, पेट्रोल-डीजल व गैस की उपलब्धता, खाद की आपूर्ति और महंगाई पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं। किसानों को भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले बुआई सीजन में खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का दबाव किसानों पर नहीं डाला जाएगा।
राज्यों के लिए दिए निर्देश
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे संकट का सबसे ज्यादा असर गरीबों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ता है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचे और श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि संकट के समय कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि जरूरी सामान की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे।