Friday, February 13, 2026
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मान सरकार का शिक्षा में क्रांतिकारी योगदान: शिक्षकों के सम्मान और युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए नया अध्याय शुरू

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में जो इंकलाबी बदलाव किए हैं, उन्होंने पूरे देश में मिसाल कायम की है। विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर श्री आनंदपुर साहिब में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को “राष्ट्र निर्माता” बताते हुए युवाओं को पंजाब की गौरवशाली विरासत से जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षण कोई पेशा नहीं बल्कि “विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने का पवित्र मिशन” है। एक शिक्षक के पुत्र होने के नाते उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि एक शिक्षक कितनी लगन और निष्ठा से अपने विद्यार्थियों के जीवन को आकार देता है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बताया कि 55 वर्षों के बाद राज्य सरकार ने श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब तक विरासत मार्ग के निर्माण कार्य की शुरुआत की है – यह कदम पंजाब की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने विद्यार्थियों को पंजाब के गौरवपूर्ण इतिहास और संस्कृति से परिचित कराएँ, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे और आधुनिकता के साथ-साथ अपने संस्कारों को भी संजोए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन शिक्षकों की भी प्रशंसा की जिन्होंने हाल ही में आई बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान असाधारण सेवा भावना दिखाई। उन्होंने बताया कि इस आपदा में 3,200 सरकारी स्कूल, 19 कॉलेज, 8,500 किलोमीटर सड़कें, और 2,500 पुल क्षतिग्रस्त हो गए, फिर भी पंजाब के लोगों और शिक्षकों ने साहस और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसे उदाहरण विश्व इतिहास में बहुत कम मिलते हैं — पंजाब के शिक्षक सिर्फ अध्यापक नहीं, बल्कि समाज के सच्चे मार्गदर्शक हैं।”

मुख्यमंत्री ने 71 प्रतिभाशाली शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया और कहा कि यह सम्मान उनके उत्कृष्ट योगदान और विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने के लिए है। उन्होंने कहा कि “गुरु” शब्द संस्कृत के “गु” (अंधकार) और “रु” (हटाने वाला) शब्दों से मिलकर बना है — अर्थात “अंधकार को दूर करने वाला।” मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज में ज्ञान, जागरूकता और रोशनी फैलाने का काम करते हैं, और पंजाब सरकार शिक्षकों के इस योगदान को नमन करती है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि पंजाब में शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। 234 प्रिंसिपल्स और शिक्षा अधिकारियों ने सिंगापुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, 152 मुख्य शिक्षकों ने आई.आई.एम. अहमदाबाद में एडवांस कोचिंग ली है और 144 प्राथमिक शिक्षक फिनलैंड की तुर्कू यूनिवर्सिटी में विशेष शिक्षा प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि नवंबर में एक और बैच फिनलैंड जाएगा। शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त कर उनके मूल कार्य — शिक्षण — पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 1,920 कैंपस मैनेजरों की नियुक्ति की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2022 में शुरू की गई “शिक्षा क्रांति” के तहत पंजाब सरकार ने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं। 118 स्कूल ऑफ एमीनेन्स स्थापित किए गए हैं, जिन पर अब तक ₹231.74 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इन स्कूलों में अब गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं — इतना ही नहीं, अब निजी स्कूलों के बच्चे भी इन स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं, जो मान सरकार की शिक्षा नीति की सफलता का प्रमाण है। इन स्कूलों के विद्यार्थियों ने NEET, JEE, CLAT, NIFT जैसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है — 265 विद्यार्थियों ने JEE Mains, 44 ने JEE Advanced, और 848 विद्यार्थियों ने NEET में योग्यता हासिल की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पहल से स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किया गया है, जिसके तहत सिविल अधिकारी सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसके साथ ही माता-पिता-शिक्षक मीटिंग (PTM) को भी नई ऊर्जा मिली है — अब तक 25 लाख से अधिक अभिभावकों ने 19,200 सरकारी स्कूलों में आयोजित PTM में भाग लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों का समर्पण, विद्यार्थियों की मेहनत और सरकार की दूरदर्शी नीतियाँ मिलकर पंजाब के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँगी।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, लोकसभा सदस्य मालविंदर सिंह कंग और कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मान सरकार का यह समारोह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि “शिक्षा के माध्यम से समृद्ध पंजाब” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक प्रेरक संदेश था — एक ऐसा पंजाब, जहाँ हर बच्चा शिक्षित, आत्मनिर्भर और अपनी विरासत पर गर्व करने वाला नागरिक बने।

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