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महाराष्ट्र के तख्त श्री हजूर साहिब के पुराने कानून को रद्द करने के प्रस्ताव का मामला, SGPC ने सरकार के फैसले पर जताया ऐतराज

महाराष्ट्र सरकार ने नांदेड़ स्थित ऐतिहासिक सिख धार्मिक स्थल तख्त श्री हजूर साहिब(Takht Sri Hazur Sahib) सचखंड गुरुद्वारा के प्रबंधन से जुड़े करीब 70 वर्ष पुराने कानून में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने मौजूदा व्यवस्था को बदलकर नया कानून लाने का प्रस्ताव मंजूर किया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

सरकार के अनुसार, यह बदलाव जस्टिस भाटिया की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा। नए कानून के जरिए गुरुद्वारे के प्रशासन और प्रबंधन से जुड़े नियमों को दोबारा निर्धारित करने की योजना है।

SGPC ने जताई आपत्ति

इस फैसले पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने चिंता जाहिर की है। SGPC कोर कमेटी के सदस्य भाई मंजीत सिंह ने कहा कि धार्मिक संस्थानों के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि एसजीपीसी का एक प्रतिनिधिमंडल नांदेड़ जाकर मामले पर चर्चा करेगा और आगे की रणनीति तय करेगा। यह फैसला धार्मिक प्रबंधन, परंपरा और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे सकता है।

क्या है सचखंड श्री हजूर अचलनगर साहिब एक्ट 1956 ?

महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सिखों के प्रमुख धार्मिक स्थल तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब के प्रबंधन से जुड़े करीब 70 साल पुराने कानून में बदलाव की तैयारी चल रही है। वर्तमान में गुरुद्वारे का संचालन नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अचलनगर साहिब एक्ट 1956 के तहत होता है। इस अधिनियम के अनुसार गुरुद्वारे के प्रशासन, धार्मिक व्यवस्था और संपत्तियों की देखरेख के लिए 17 सदस्यीय बोर्ड का प्रावधान किया गया था।

यह बोर्ड तख्त साहिब के दैनिक कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालता है जबकि अध्यक्ष का चुनाव बोर्ड के सदस्यों में ही लोकतंत्र को महत्व देते हुए किया जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने 1956 के कानून की जगह नया तख्त सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब गुरुद्वारा एक्ट लाने का प्रस्ताव तैयार किया है। जिसे विधानमंडल में पेश करने की तैयारियां चल रही हैं। लेकिन SGPC समेत विभिन्न सिख समुदायों द्वारा सरकार के इस फैसले का विरोध किया जा रहा है।

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