देश के कई हिस्सों में कम बारिश होने और जुलाई में भी मानसून के पूर्वानुमान को देखते हुए केंद्र सरकार अब सतर्क है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से पैदा हो सकने वाली सूखे जैसी स्थिति पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।
कई अधिकारियों के साथ की समीक्षा
इस बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि, जल संसाधन, बिजली और अन्य संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कम बारिश के असर, किसानों की चुनौतियों और संभावित समाधान पर विस्तार से चर्चा हुई। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिन इलाकों में वर्षा कम हो रही है, वहां किसानों तक समय पर वैज्ञानिक सलाह पहुंचाना बेहद जरूरी है ताकि फसलों को होने वाला नुकसान कम किया जा सके।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश
अमित शाह ने कृषि मंत्रालय को निर्देश दिया कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को ऐसी फसलों की जानकारी दी जाए, जिनमें पानी की खपत कम होती है। इसके साथ ही मोटे अनाज, दालों और पशुओं के चारे वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य यह है कि पानी की कमी के बावजूद कृषि उत्पादन प्रभावित न हो।
जून बना 125 वर्षों का पांचवां सबसे सूखा महीना
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देशभर में केवल 99.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम है। वर्ष 1901 के बाद यह जून का पांचवां सबसे सूखा महीना रहा। सबसे अधिक कमी मध्य भारत में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत से ज्यादा कम बारिश हुई। मौसम विभाग ने जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और जल संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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