Saturday, February 14, 2026
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भारत से बैर तो चीन पर मेहरबान क्यों हुए ट्रंप ? सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लागू कर दिया है और आने वाले समय में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की योजना बना रहे हैं। इसके विपरीत, चीन के मामले में उनका रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा है। ट्रंप ने चीन को नए टैरिफ दर लागू करने के लिए 90 दिन की मोहलत दी है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की इच्छा जताई है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर चीन के प्रति इस नरमी का कारण क्या है?

चीन की रणनीतिक बढ़त
हालांकि चीन अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से ट्रेड वॉर चल रहा है, लेकिन टैरिफ लगाने के मामले में ट्रंप अब तक सतर्क रहे हैं। इसका मुख्य कारण दुर्लभ खनिज (Rare Earth Materials) हैं, जिनकी आपूर्ति के लिए अमेरिका काफी हद तक चीन पर निर्भर है। इस साल की शुरुआत में बीजिंग ने अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए सात प्रमुख रेयर अर्थ उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी। इस कदम से वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कठिनाइयां बढ़ गईं।

आर्थिक दबाव और सुरक्षा जरूरतें
चीन द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों को आर्थिक हथियार के रूप में देखा गया है। अमेरिका के रक्षा क्षेत्र, खासकर फाइटर जेट्स के निर्माण में इन खनिजों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन चीन के इस दबाव को नजरअंदाज नहीं कर सकता था। परिणामस्वरूप, टैरिफ संबंधी योजनाओं को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका और वार्ता को प्राथमिकता दी गई।

तकनीकी और औद्योगिक निर्भरता
Rare Earth Materials के अलावा भी अमेरिका कई क्षेत्रों में चीन पर निर्भर है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में चीनी आपूर्ति और सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए अहम है। इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में अमेरिका को अभी समय लगेगा। ऐसे में, चीन के साथ रिश्तों में तनाव बढ़ाना अमेरिकी उद्योग जगत के हितों के खिलाफ हो सकता है।

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