Tuesday, March 3, 2026
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Home Loan होगा सस्ता! दिवाली से पहले ब्याज दरों में हो सकती भारी कटौती

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आर्थिक विशेषज्ञों का मानना ​​है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर 2024 में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जो उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत हो सकती है। अगर यह कटौती होती है तो दिवाली के मौके पर आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर को 6.8 फीसदी पर बरकरार रखा है। एजेंसी ने कहा है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 6.9 फीसदी तक पहुंच सकती है। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मुद्रास्फीति प्रबंधन नीतियों की तारीफ करते हुए कहा गया कि अक्टूबर 2024 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। इसका असर लोन लेने वालों पर भी पड़ेगा, उनकी हर महीने चुकाई जाने वाली EMI कम हो सकती है।

इससे पहले अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने भी अपनी नीतिगत ब्याज दर में 0.50 फीसदी की कटौती की है। इसके बाद अगले महीने RBI द्वारा इसमें 0.25 फीसदी की कटौती किए जाने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान: वित्त वर्ष 2024-25 में वृद्धि दर 6.8% और 2025-26 में 6.9% रहने का अनुमान है।

ब्याज दरों में कटौती संभव: रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रास्फीति आरबीआई के 4% लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। ऐसे में अक्टूबर 2024 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष में दरों में दो बार कटौती की संभावना है।

राजकोषीय नीति: सरकार ने बजट में राजकोषीय समेकन पर जोर देते हुए 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.5 प्रतिशत रखा है। साथ ही, बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए 11.11 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो आर्थिक विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

एसएंडपी ग्लोबल ने चीन के विकास पूर्वानुमान में कटौती की है। चीन के 2024 के विकास पूर्वानुमान को 4.8% से घटाकर 4.6% कर दिया गया है, और 2025 तक यह 4.3% तक गिर सकता है। इसका मुख्य कारण चीन के प्रॉपर्टी सेक्टर में मंदी और कमजोर घरेलू मांग को माना जा रहा है।

भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और सरकार की राजकोषीय नीतियों को देखते हुए, एसएंडपी ग्लोबल का मानना ​​है कि देश की आर्थिक वृद्धि संतुलित रहेगी, जबकि ब्याज दरों में संभावित कटौती से घरेलू बाजार में जान आएगी।