Monday, March 2, 2026
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Himachal Pradesh : शिमला में बुजर्ग बना साइबर ठगी का शिकार, कॉल फारवर्डिंग में गवाएं 10 लाख रुपये

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साइबर ठग लगातार लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अब वॉयस क्लोनिंग और कॉल फारवर्डिंग स्कैम के जरिए बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ाए जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से सामने आया है। पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि न तो उनके पास कोई ओटीपी आया और न ही उन्होंने किसी लिंक पर क्लिक किया। फोन उठाने के कुछ ही देर बाद उनके मोबाइल पर बैंक से लगातार मैसेज आए, जिनमें खाते से पैसे निकलने की जानकारी थी।

कैसे हुआ स्कैम?

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ठग सीधे पैसे नहीं निकालते, बल्कि चालाकी से पीड़ित का फोन बैंक के ऑटोमेटिक वेरिफिकेशन सिस्टम से जोड़ देते हैं। इसके लिए वे कॉल मर्ज करने या किसी खास कोड को डायल करने को कहते हैं। जैसे ही पीड़ित कॉल मर्ज करता है या बताए गए कोड को दबाता है, फोन की कॉल और मैसेज फॉरवर्ड हो जाती हैं। इसके बाद ठग आसानी से OTP हासिल कर बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं।

कई मामलों में ठग कॉल फारवर्डिंग एक्टिव कराने के नाम पर लोगों को झांसे में लेते हैं, जिससे पीड़ित को पता भी नहीं चलता और उसका पूरा बैंक कंट्रोल अपराधियों के हाथ में चला जाता है।

पुलिस केस की कर रही जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस के साथ-साथ साइबर विंग की टीम भी जांच में जुट गई है। पुलिस उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनके जरिए यह राशि एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर की गई। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में कई लेयर तक बैंक खातों की जांच की जाती है, लेकिन शिकायत में देरी होने पर पैसा वापस मिलना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें ?

  • ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए किसी अनजान नंबर से कॉल आए और कॉल फारवर्डिंग एक्टिव करने को कहा जाए तो तुरंत मना करें।
  • *21# या *401# जैसे कोड कभी भी किसी के कहने पर डायल न करें।
  • अगर गलती से कोई कोड डायल हो गया हो, तो ##002# डायल कर सभी प्रकार की कॉल फारवर्डिंग बंद करें।
  • *#21# डायल कर जांचें कि आपकी कॉल या मैसेज फॉरवर्ड तो नहीं हो रहे।
  • किसी को भी अपना ओटीपी न बताएं, चाहे वह खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए।