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पेट्रोल से 20 रुपये सस्ता E85 ईंधन लॉन्च, जानें कैसे मिलेगा इसका फायदा

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर केंद्र सरकार ने वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए E85 ईंधन की शुरुआत की है। नई दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस नए ईंधन को लॉन्च किया। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल आम उपभोक्ताओं को राहत देगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

क्या है E85 ईंधन?

E85 एक विशेष प्रकार का एथेनॉल मिश्रित ईंधन है जिसमें लगभग 80 से 85 प्रतिशत एथेनॉल और शेष हिस्सा पेट्रोल का होता है। यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है। इस ईंधन का उपयोग मुख्य रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकता है। ऐसे वाहन विभिन्न स्तर के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने में सक्षम होते हैं और उन्हें विशेष रूप से इसी उद्देश्य के लिए डिजाइन किया जाता है।

उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

सरकार के अनुसार E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम होगी। इसका मतलब है कि जहां पेट्रोल की कीमत 100 रुपये से अधिक हो सकती है वहीं E85 अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प बनकर सामने आएगा। इससे वाहन चालकों के ईंधन खर्च में कमी आने की उम्मीद है। बढ़ती ईंधन कीमतों के दौर में यह कदम आम लोगों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।

फिलहाल E85 ईंधन की उपलब्धता देशभर के 48 चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर शुरू की गई है। सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की योजना पर काम कर रही है। लक्ष्य है कि आने वाले समय में सैकड़ों और बाद में हजारों पेट्रोल पंपों पर यह ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

किसानों के लिए भी खुलेंगे नए अवसर

E85 ईंधन की शुरुआत केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। ऐसे में इसकी मांग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में नए निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

विदेशी तेल पर निर्भरता होगी कम

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन के बढ़ते उपयोग से इस निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है। घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले ईंधन के कारण विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

E85 को पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाई जा सकती है। इससे वायु प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ वातावरण बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही एथेनॉल की उच्च ऑक्टेन क्षमता इंजन की कार्यक्षमता को भी बेहतर बना सकती है।

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