अमेरिका से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। US Supreme Court ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को झटका देते हुए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए उनके ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थितियों में किया जा सकता है।
फैसले के बाद ट्रंप का पलटवार
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर ट्रंप ने नया दांव चलते हुए 10% ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके जरिए दुनिया के सभी देशों से आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला किया गया। इसकी जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा की।
क्या अब सिर्फ 10% टैरिफ देना होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत सहित अन्य देशों पर अब केवल 10% टैरिफ ही लागू होगा? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि जब तक कोई अन्य प्रावधान लागू नहीं होता, तब तक 10% टैरिफ प्रभावी रहेगा।
इसका सीधा अर्थ यह हो सकता है कि पहले प्रस्तावित 18% या उससे अधिक शुल्क के बजाय भारतीय उत्पादों पर 10% टैरिफ लगे। हालांकि, ट्रंप का एक बयान यह भी कहता है कि यह 10% वैश्विक टैरिफ मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त हो सकता है। ऐसे में अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन इसे कैसे लागू करता है।
IEEPA की जगह नया प्रावधान
गौरतलब है कि ट्रंप ने अप्रैल 2025 में तथाकथित “लिब्रेशन डे” के मौके पर 10% से 50% तक के रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था। ये शुल्क IEEPA के तहत लगाए गए थे, जिन्हें अब अदालत ने असंवैधानिक ठहराया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, नया 10% वैश्विक टैरिफ फिलहाल उन्हीं शुल्कों की जगह लेगा, जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं की जाती।
कितने समय तक रहेगा लागू?
ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लगाए गए इस 10% टैरिफ को अस्थायी कदम बताया है। जानकारी के अनुसार, यह लगभग 150 दिनों यानी करीब पांच महीनों तक प्रभावी रह सकता है।
भारत और दुनिया पर संभावित असर
अगर 10% टैरिफ ही प्रभावी रहता है, तो भारतीय निर्यातकों को पहले की तुलना में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन यदि यह मौजूदा टैरिफ के ऊपर जोड़ा गया, तो वैश्विक व्यापार पर इसका असर व्यापक हो सकता है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अमेरिकी व्यापार नीति में बड़ा मोड़ ला दिया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि नया 10% ग्लोबल टैरिफ स्थायी नीति का रूप लेता है या केवल अंतरिम कदम साबित होता है।