Thursday, February 19, 2026
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Delhi : अब छोटे अपराधों पर नहीं होगी जेल, जानें क्या कहता है रेखा कैबिनेट का पास किया गया बिल…

दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में एक अहम बदलाव की दिशा में मंगलवार को बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट बैठक में दिल्ली जन विश्वास उपबंध संशोधन विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य छोटे और तकनीकी किस्म के अपराधों को आपराधिक दायरे से बाहर निकालकर उन्हें सिविल पेनाल्टी में बदलना है, ताकि आम नागरिकों और व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत मिल सके।

अब आम जीवन होगा आसान

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह विधेयक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ ईज ऑफ लिविंग को भी मजबूती देगा। अब मामूली नियम उल्लंघन पर आपराधिक मामला दर्ज नहीं होगा, जिससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी बल्कि अदालतों पर बढ़ता बोझ भी कम होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक को दिल्ली विधानसभा के विंटर सेशन में पेश किया जाएगा, जिसकी शुरुआत 5 जनवरी से होने जा रही है।

इन प्रमुख कानूनों में होगा बदलाव

इस संशोधन विधेयक के तहत दिल्ली के कई अहम कानूनों को शामिल किया गया है। इनमें शामिल हैं-

  • दिल्ली इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एक्ट
  • दिल्ली शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट एक्ट
  • ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ बेड एंड ब्रेकफास्ट एक्ट
  • दिल्ली जल बोर्ड एक्ट
  • दिल्ली प्रोफेशनल कॉलेजेज एक्ट
  • डिप्लोमा लेवल टेक्निकल एजुकेशन एक्ट
  • दिल्ली एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एक्ट

इन सभी कानूनों के तहत अब छोटे उल्लंघनों के मामलों में जेल या आपराधिक कार्रवाई की जगह जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।

हर तीन साल में बढ़ेगा जुर्माना

बिल में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि कानून लागू होने के बाद जुर्माने की राशि में हर तीन साल में स्वतः 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। सरकार का मानना है कि इससे महंगाई के अनुरूप पेनाल्टी प्रभावी बनी रहेगी और नियमों का पालन भी सुनिश्चित होगा, बिना किसी अनावश्यक डर या उत्पीड़न के।

ईज ऑफ लिविंग की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह विधेयक केंद्र सरकार के जन विश्वास (संशोधन) अधिनियम की तर्ज पर तैयार किया गया है। दिल्ली सरकार का उद्देश्य एक विश्वास-आधारित, सरल और व्यावहारिक प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।

सरकार का मानना है कि यह फैसला दिल्ली में पारदर्शी शासन, बेहतर कारोबारी माहौल और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।

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