Friday, February 13, 2026
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जमीन बिक्री के मामले में महिला तहसीलदार पर केस दर्ज

एमएच वन न्यूज, फरीदाबाद : NIT स्थित एक कंपनी के औद्योगिक प्लाट को किसी ओर कंपनी का बताकर नीमाली करने के मामले में तहसीलदार नेहा सरन पर केस दर्ज किया गया है। प्लाट के असल मालिक ने तहसीलदार नेहा सरन को अवगत कराया था लेकिन नेहा सरन ने उसकी एक न सुनी। इतना ही नहीं इस मामले में तहसीलदार नेहा सरन ने हाईकोर्ट व डीसी के आदेशों की भी अवहेलना की है।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट और डिप्टी कमिश्नर ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए कहा था थाना मुजेसर के एएसआई ईश्वर सिंह ने तहसीलदार पर केस दर्ज होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अमरजीत चावला नाम के व्यक्ति की शिकायत पर बड़खल तहसीलदार नेहा सरन, दीपक मनचंदा, राकेश दीवान और पुलकित दीवान के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

मामला पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद बड़खल तहसीलदार नेहा सरन के खिलाफ जालसाजी की एफआईआर दर्ज हो गई। तहसीलदार के साथ इस मामले में नव भारत पेंट्स के मालिक दीपक मनचंदा, राकेश दीवान और पुलकित दीवान को भी आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत दर्ज एफआईआर में नामजद किया गया है।

मेसर्स यूनीक स्प्रिंग (इंडिया) के पास प्लॉट का मालिकाना हक

फ्रेंड्स ऑटो इंडिया लिमिटेड के निदेशक अमरजीत सिंह चावला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि एनआईटी फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट नंबर 38-ए है। जिसका स्वामित्व मेसर्स यूनीक स्प्रिंग (इंडिया) के पास था। उनकी कंपनी ने इसे मासिक किराए पर लिया था। हालांकि बाद में इसे छोड़ दिया, जिसके बाद यूनिक स्प्रिंग ने यह प्लॉट मेसर्स मेहर ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड को किराए पर दे दिया।

हाईकोर्ट ने लगाई वसूली की कार्रवाई पर रोक

उनकी कंपनी फ्रेंड्स ऑटो इंडिया का मेसर्स नव भारत पेंट्स के साथ कुछ लेन-देन था, जिसको लेकर नव भारत पेंट्स और फ्रेंड्स ऑटो के बीच मुकदमे शुरू हो चुके थे, जिसमें मेसर्स फ्रेंड्स ऑटो इंडिया लिमिटेड के खिलाफ वसूली की कार्रवाई शुरू की गई। यह कार्रवाई डिप्टी कमिश्नर को भेज दी गई। इसी बीच फ्रेंड्स कंपनी ने चंडीगढ़ में पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वसूली की कार्रवाई पर रोक लगवा दी। हाईकोर्ट ने उनको अपनी शिकायत के लिए सक्षम कोर्ट जाने की छूट दी।

तहसीलदार ने पटवारी से नीलामी नोटिस जारी कराया

आपत्तियां लंबित होने के बावजूद तहसीलदार बड़खल नेहा सरन ने नवभारत पेंट्स के दीपक मनचंदा, राकेश दीवान और पुलकित दीवान के साथ मिलीभगत की। जिसके बाद पटवारी अजरौंदा फरीदाबाद से प्लॉट नंबर 38-ए, औद्योगिक क्षेत्र, एनआईटी फरीदाबाद की नीलामी के लिए नोटिस जारी करा दिया। इसमें खास बात यह थी कि नोटिस टाइप किया हुआ था लेकिन तारीख हाथ से लिखी गई थी।

डीसी ने तहसीलदार को हाईकोर्ट के आदेशानुसार कार्रवाई के लिए कहा

चावला ने बताया कि उन्होंने इसको लेकर तुरंत तत्कालीन तहसीलदार बड़खल और जिला कलेक्टर फरीदाबाद के कार्यालय से संपर्क किया। तहसीलदार को विधिवत सूचित किया गया कि आपत्तियां पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और मामला आगे बढ़ने की संभावना है। 29 जुलाई 2024 को तहसीलदार बड़खल को पत्र प्राप्त भी हो चुका था। जिसे डीसी फरीदाबाद कार्यालय ने 30 जुलाई 2024 को जारी किया था। डीसी ने तहसीलदार बड़खल को आदेश दिए थे कि पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट चंडीगढ़ के 21 मई के आदेश के हिसाब से कार्रवाई की जाए। तहसीलदार बड़खल पर आरोप है कि इन सबके बावजूद उन्होंने आरोपियों के साथ मिलीभगत करके प्लॉट नंबर 38-ए, औद्योगिक क्षेत्र, एनआईटी फरीदाबाद के संबंध में 2 अगस्त 2024 को फिर से नीलामी तय कर दी।

प्लॉट नंबर 38 की होनी थी नीलामी

इस दौरान मेसर्स यूनीक स्प्रिंग (इंडिया) के मालिक ने तहसीलदार बड़खल फरीदाबाद को एक पत्र भी दिया था कि वह संपत्ति का मालिक है और इस संपत्ति को नीलाम नहीं किया जा सकता है। उनकी बात नहीं मानी गई तो कंपनी ने तहसीलदार बड़खल और अन्य आरोपियों के खिलाफ सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

इस दौरान खुलासा हुआ कि इस मामले में प्लॉट नंबर 38 की नीलामी होनी थी न कि प्लॉट नंबर 38-ए की। इसके बावजूद नीलामी के नोटिस 38ए के निकाल दिए गए। इसके बाद तहसीलदार बड़खल और अन्य अधिकारी प्लॉट नंबर 38-ए में आए और उसकी नीलामी करा दी।

आरोप हैं कि प्लॉट नंबर 38, औद्योगिक क्षेत्र एनआईटी फरीदाबाद के फर्जी नीलामी रिकॉर्ड तैयार किए हैं। तहसीलदार बड़खल ने जानकारी होने और डीसी फरीदाबाद के आदेशों के बावजूद सबसे पहले तो प्लॉट नंबर 38-ए औद्योगिक क्षेत्र एनआईटी फरीदाबाद के संबंध में नीलामी की कार्रवाई नहीं रोकी।

फर्जी दस्तावेज किए तैयार

जब उन्हें पता चला कि उन्होंने गलत नीलामी नोटिस जारी किए हैं, तो प्लॉट नंबर 38 औद्योगिक क्षेत्र एनआईटी फरीदाबाद की नीलामी कार्रवाई के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। यही नहीं, इस नीलामी को लेकर न तो कोई बोली राशि तय की गई थी, न ही नीलामी का प्रकाशन किया गया था। इस प्लॉट में कथित खरीदार राकेश दीवान से 2 अगस्त 2024 से पहले कोई राशि प्राप्त नहीं हुई थी।

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