मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इस्लामाबाद में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ कर रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी उनके साथ मौजूद हैं।
अमेरिका-ईरान वार्ता में बनी बात
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में एक अच्छी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के विदेशों में फंसे फंड्स को जारी करने पर सहमत हो सकता है। यह रकम कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा है। इसके बदले ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। तेहरान इस कदम को अमेरिका की ओर से ‘गुडविल’ और वार्ता के प्रति गंभीरता के संकेत के तौर पर देख रहा है।
ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
वार्ता से ठीक पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका “अमेरिका फर्स्ट” की नीति के तहत बातचीत करता है, तो एक संतुलित और लाभकारी समझौता संभव है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका “इजरायल फर्स्ट” की रणनीति अपनाता है, तो कोई समझौता नहीं होगा। ऐसी स्थिति में ईरान और ज्यादा मजबूती से जवाब देगा, जिसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है।
होर्मुज संकट पर टिकी दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता का सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यहां स्थिरता आने से वैश्विक तेल बाजार और व्यापार पर सकारात्मक असर पड़ सकता है इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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