US-India ट्रेड डील में क्या-क्या नहीं शामिल ? केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री मोदी के वादे के मुताबिक, इस डील में भारतीय किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर चल रही चर्चाओं और उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता का पूरा ध्यान रखा गया है, जिसमें उन्होंने देश को किसी भी दबाव में न झुकने और किसानों के हितों से कोई समझौता न करने की बात कही थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस ट्रेड डील के ढांचे को बनाते समय यह सुनिश्चित किया गया है कि भारतीय किसानों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। कृषि और कृषि उत्पादों की बात करें तो ऐसा कोई भी उत्पाद इस समझौते में शामिल नहीं किया गया है, जिससे किसानों के हित प्रभावित हो सकते हों। ऐसे सभी संवेदनशील उत्पादों को ट्रेड डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
किन उत्पादों पर नहीं दी गई टैरिफ छूट ?
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रमुख फसलें, फल और डेयरी क्षेत्र अमेरिकी आयात के लिए नहीं खोले गए हैं। अमेरिका से किसी भी प्रकार का लिक्विड दूध, मिल्क पाउडर, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर या चीज़ भारत में आयात नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मसाले पूरी तरह सुरक्षित हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत से कई कृषि उत्पाद अमेरिका को ज़ीरो ड्यूटी पर निर्यात किए जाएंगे, लेकिन अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में वैसी छूट नहीं दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है।
भारत के मसालों के निर्यात में हुई बढ़ोतरी
शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि इस समझौते के बाद भारत के मसालों के निर्यात में 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और भारत अब दुनिया के करीब 200 देशों को मसाले और उनसे जुड़े उत्पाद निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस डील के तहत भारतीय किसानों को टैरिफ में पूरी राहत दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर में भारत का टैरिफ अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी कम है, जिससे इस क्षेत्र को भी फायदा होगा।
साथ ही इस समझौते से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आजीविका में भी सुधार आने की उम्मीद है। अपने बयान के अंत में केंद्रीय मंत्री ने सरकार पर लगाए जा रहे सभी आरोपों को खारिज करते हुए दोहराया कि सरकार ने किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया है और यह ट्रेड डील पूरी तरह से देश और अन्नदाताओं के पक्ष में है।
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