4 मंत्रियों सहित 22 विधायकों की राजनीति पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट करेगा फैसला
हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत के पीछे जहां कांग्रेस की ओर से ईवीएम को दोष दिया जा रहा है।

चंद्रशेखर धरणी : हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिले प्रचंड बहुमत के पीछे जहां कांग्रेस की ओर से ईवीएम को दोष दिया जा रहा है। वहीं, अब प्रदेश के 4 मंत्रियों समेत 22 विधायकों के चुनाव को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इनमें सबसे अधिक भारतीय जनता पार्टी के 17, कांग्रेस के 3, इनेलो के 1 और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं। हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में से कुछ पर सुनवाई शुरू हो गई है, जबकि कुछ पर सुनवाई शुरू होना बाकी है। ऐसे में अब इन विधायकों के राजनीतिक भविष्य का फैसला हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा।
कोर्ट ने मांगा चुनाव आयोग से जवाब
हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में से कुछ पर सुनवाई शुरू हो चुकी है तो कुछ पर सुनवाई होनी बाकी है। अधिकतर याचिकाओं में सुनवाई के लिए अगली तारीफ फरवरी माह की लगी है। कुछ मामलों में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं तो कुछ में चुनाव आयोग से जवाब मांगा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि किसी भी चुनाव के बाद हारने वाले उम्मीदवारों द्वारा याचिकाएं हाई कोर्ट में डालने की परंपरा बन गई है, जो कई-कई सालों तक चलती रहती हैं। कई मामलों आरोपी अपना दूसरा चुनाव भी जीत जाते हैं और हाईकोर्ट में पहली याचिका पर सुनवाई जारी रहती है। फिलहाल हरियाणा में पहली बार इतनी बड़ी तादाद में नव निर्वाचित विधायकों के खिलाफ याचिकाएं दायर हुई हैं।
इन मंत्रियों के चुनाव को चुनौती
हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं में जिन जिन मंत्रियों के चुनाव को चुनौती दी गई है, अटेली की विधायक और स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव, फरीदाबाद से विधायक और शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल, पानीपत ग्रामीण से विधायक और शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के साथ पलवल से विधायक व खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम शामिल हैं। इनमें अटेली की विधायक आरती सिंह राव के खिलाफ अतर लाल, फरीदाबाद के विधायक विपुल गोयल के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार रहे लखन सिंगला, पानीपत के विधायक महीपाल ढांडा के खिलाफ कांग्रेस नेता सचिन और पलवल के विधायक गौरव गौतम के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार रहे और पूर्व मंत्री करण दलाल ने याचिका दायर की है।
बीजेपी के इन विधायकों के खिलाफ याचिका
हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में भाजपा के विधायकों पर चुनाव के दौरान सत्ता और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के साथ ईवीएम में गड़बड़ी कराने का आरोप है। साथ ही प्रचार के दौरान तय सीमा से अधिक राशि खर्च करने का भी जिक्र याचिका में किया गया है। बीजेपी के जिन विधायकों के खिलाफ कांग्रेस नेताओं की ओर से याचिका दायर की गई है।
उनमें उचाना के विधायक देवेंद्र अत्री, बड़खल के विधायक धनेश अदलखा, होडल के विधायक हरिंदर सिंह, नलवा के विधायक रणधीर पनिहार, फरीदाबाद एनआइटी के विधायक सतीश कुमार, दादरी के विधायक सुनील सांगवान, बावल के विधायक कृष्ण कुमार रंगा, राई की विधायक कृष्णा गहलावत, नीलोखेड़ी के विधायक भगवान दास कबीरपंथी, इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप, सोनीपत के विधायक निखिल मदान, सफीदो के विधायक रामकुमार गौतम और खरखौदा के विधायक पवन खरखौदा शामिल हैं।
कांग्रेस और इनेलो विधायकों के खिलाफ भी याचिका
हाई कोर्ट में दायर याचिकाओं में केवल सत्तारुढ भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के खिलाफ ही याचिकाएं दायर नहीं की गई है, बल्कि विपक्षी दल कांग्रेस और इनेलो के विधायकों के खिलाफ भी याचिकाएं दायर की गई है। इनमें थानेसर के कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा, पंचकूला से कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन बिश्नोई, लोहारू के कांग्रेस विधायक राजबीर फरटिया और डबवाली के इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका डाली गई है।
निर्दलीय के चुनाव के भी चुनौती
राजनीतिक दलों के अलावा निर्दलीय रूप से जीत हासिल करने वाले एक विधायक के खिलाफ भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। बहादुरगढ़ के निर्दलीय विधायक राजेश जून के चुनाव को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
हरियाणा विधानसभा का गणित
आठ अक्टूबर 2024 को घोषित हुए हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी 48, कांग्रेस 37, इनेलो 2 और निर्दलीय 3 सीट पर चुनाव जीते थे। ऐसे में 48 सीट जीतकर भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
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