भारत में पहली सार्वजनिक सभा में यूनुस पर बरसीं शेख हसीना
बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में अपनी पहली सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर तीखा और अभूतपूर्व हमला बोला।
बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारत में अपनी पहली सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर तीखा और अभूतपूर्व हमला बोला। शेख हसीना ने यूनुस पर अवैध और हिंसक शासन चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश को आतंक और अराजकता के युग में धकेल दिया है।
दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में आयोजित कार्यक्रम को शेख हसीना ने ऑडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने बांग्लादेश में मौजूदा हालात को देश की संप्रभुता और संविधान के लिए “अस्तित्व की लड़ाई” करार दिया। हसीना ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे विदेशी हितों से संचालित कठपुतली शासन के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।
‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम
‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ’ शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में अवामी लीग सरकार के कई पूर्व मंत्री और बड़ी संख्या में बांग्लादेशी प्रवासी शामिल हुए। हालांकि शेख हसीना स्वयं कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नहीं थीं, लेकिन उनका संदेश खचाखच भरे हॉल में प्रसारित किया गया। अपने भाषण में उन्होंने मुहम्मद यूनुस को “हत्यारा फासीवादी, सूदखोर, मनी लॉन्डरर और सत्ता-लोभी गद्दार” तक कहा।
‘देश जेल और मौत की घाटी बन चुका है’
अपने भाषण की शुरुआत शेख हसीना ने मुक्ति संग्राम की विरासत और अपने पिता, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज खाई के कगार पर खड़ा है और हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि देश एक जेल, फांसीगाह और मौत की घाटी में तब्दील हो गया है। उन्होंने चरमपंथी ताकतों और विदेशी शक्तियों पर देश को तबाह करने का आरोप लगाया। शेख हसीना ने दावा किया कि 5 अगस्त 2024 को उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत जबरन सत्ता से हटाया गया। उन्होंने कहा कि उनके हटते ही बांग्लादेश आतंक के दौर में प्रवेश कर गया, लोकतंत्र निर्वासन में चला गया और मानवाधिकारों का दमन शुरू हो गया।
यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए हसीना ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी गई है, जबकि महिलाओं और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को खुली छूट दी जा रही है।
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