ग्रीनलैंड पर अधिग्रहण की तैयारी हुई तेज, तनाव के बीच अमेरिका ने भेजा एयरक्राफ्ट

यह जानकारी नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) ने दी है। NORAD के मुताबिक, ये विमान अमेरिका और कनाडा में मौजूद अन्य सैन्य ठिकानों से उड़ान भरने वाले विमानों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी अभियानों में हिस्सा लेंगे।

Jan 20, 2026 - 08:26
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ग्रीनलैंड पर अधिग्रहण की तैयारी हुई तेज, तनाव के बीच अमेरिका ने भेजा एयरक्राफ्ट

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह जल्द ही ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस पर अपने सैन्य विमान भेजने वाला है। यह जानकारी नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) ने दी है। NORAD के मुताबिक, ये विमान अमेरिका और कनाडा में मौजूद अन्य सैन्य ठिकानों से उड़ान भरने वाले विमानों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी अभियानों में हिस्सा लेंगे।

सुरक्षा योजनाओं का हिस्सा

अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला किसी अचानक हालात का नतीजा नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा योजनाओं का हिस्सा है। इस पूरी सैन्य गतिविधि को डेनमार्क के साथ समन्वय में अंजाम दिया जा रहा है। ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकार को भी पहले से इसकी जानकारी दे दी गई थी। हालांकि, अमेरिकी सेना ने यह नहीं बताया है कि सैन्य विमान किस तारीख को पिटुफिक स्पेस बेस पहुंचेंगे, लेकिन इस कदम की टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकी से बढ़ा तनाव

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सख्त बयान दे रहे हैं। ट्रंप ने यूरोप के कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं दी गई तो डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर फरवरी से 10 प्रतिशत और जून तक 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि जब तक कोई समझौता नहीं होता, तब तक ये टैरिफ लागू रहेंगे।

यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया

ट्रंप के इन बयानों के बाद यूरोप में कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेटसोला ने दो टूक कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ खड़ा है। साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड की संप्रभुता और सीमाओं के सम्मान की बात दोहराई और कहा कि विवाद सुलझाने के लिए बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए।

डेनमार्क के कदम, नाटो से समन्वय

इस पूरे घटनाक्रम के बीच डेनमार्क ने भी अपनी सुरक्षा तैयारियां बढ़ा दी हैं। डेनमार्क सरकार ने ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके। डेनमार्क के रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉल्सन ने बताया कि उनका देश नाटो के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में निगरानी अभियान शुरू करने का प्रस्ताव रख चुका है। इस योजना को लेकर नाटो और ग्रीनलैंड प्रशासन के साथ बातचीत जारी है।

हालांकि, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने इस आशंका को खारिज किया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करेगा। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात को कूटनीतिक नजरिए से देखा जाना चाहिए।

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