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सावन के तीसरे सोमवार पर मंदिरों में भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तों की उमड़ी भीड़

शिव मंदिरों में सावन के तीसरे सोमवार को आने वाली भीड़ को देखते हुए रविवार को विशेष साफ-सफाई की गई। श्रद्धालु भी पूजन की तैयारियों में जुटे रहे। भीड़ को देखते हुए मंदिर व्यवस्थापकों के साथ पुलिस प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर में विशेष साफ-सफाई की गई।

रविवार को भी दिनभर श्रद्धालु पूजन की तैयारी में जुटे रहे। वहीं, मंदिर प्रबंधक भी सोमवार को लेकर अपनी तैयारियों में जुटे रहे। सावन के तीसरे सोमवार को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचेगी। जलाभिषेक के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पंडित मणिकांत उपाध्याय ने बताया कि श्रावण का पूरा महीना जप, तप और ध्यान के लिए उत्तम है, लेकिन इसमें सोमवार का विशेष महत्व है। सोमवार चंद्रमा का दिन है और भगवान शिव चंद्रमा के नियंत्रक हैं। इस दिन पूजा करने से न केवल चंद्रमा बल्कि भगवान शिव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिस किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, विवाह में अड़चनें या दरिद्रता हो, अगर वह सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विधिवत पूजा करता है, तो उसे सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

ऐसे में सावन के सोमवार को देवाधिषदेव महादेव के जलाभिषेक और पूजा के लिए शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ता है। सावन के सोमवार को पूजा का महत्व शहर के श्री सिंहेश्वरी देवी मंदिर के पुजारी पंडित शारदा प्रसाद पांडेय ने बताया कि सोमवार की पूजा भगवान शिव की पूजा और विशेष रूप से वैवाहिक जीवन के लिए की जाती है। अगर कुंडली में विवाह का योग न हो या विवाह होने में बाधाएं आ रही हों, तो सावन के सोमवार को पूजा करनी चाहिए। अगर कुंडली में आयु या स्वास्थ्य की समस्या हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो तो भी सावन के सोमवार की पूजा सर्वश्रेष्ठ होती है। सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा सर्वश्रेष्ठ होती है। इसमें मुख्य रूप से शिवलिंग की पूजा कर उस पर जल और बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं।

शहर के पंडित विजय मिश्रा ने बताया कि सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद हाथ में अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पास के शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, जल, बेलपत्र, सुपारी, फूल, फल, भांग, धतूरा आदि चढ़ाएं और विधि-विधान से शिव की पूजा करें। सोमवार व्रत में कथा सुनना अनिवार्य माना गया है। कथा सुनने के बाद शिव मंत्रों का जाप करें और प्रार्थना करें।

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