Tuesday, March 3, 2026
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Mathura : प्रेमानंद जी महाराज के फ्लैट में लगी आग, टल गया बड़ा हादसा…

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उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृंदावन के छटीकरा मार्ग पर स्थित श्रीकृष्ण शरणम् सोसाइटी में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब संत प्रेमानंद जी महाराज के नाम से जुड़े फ्लैट संख्या 212 में अचानक भीषण आग लग गई। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि प्रशासन द्वारा इसकी औपचारिक पुष्टि अभी की जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह के समय फ्लैट से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया, जिसके बाद कुछ ही देर में आग की लपटें बाहर तक नजर आने लगीं। आग लगते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। राहत की बात यह रही कि संत प्रेमानंद जी महाराज पिछले लगभग एक महीने से वृंदावन स्थित श्री राधाहित कैलिकुंज में निवास कर रहे हैं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग की टीम

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समय रहते आग पर नियंत्रण कर लिया गया, जिससे अन्य फ्लैटों को नुकसान नहीं पहुंचा। इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

हालांकि आग बुझाने के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब संत प्रेमानंद जी महाराज के सेवादारों का व्यवहार सवालों के घेरे में आ गया। बताया जा रहा है कि कवरेज कर रहे पत्रकारों और वीडियो बना रहे स्थानीय लोगों को सेवादारों ने जबरन रोकने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ लोगों से मोबाइल फोन छीन लिए गए और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।

ब्रजवासियों में क्यों फैला आक्रेश ?

सेवादारों के इस आक्रामक और अमर्यादित व्यवहार को लेकर स्थानीय ब्रजवासियों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि आपदा के समय जब स्थानीय निवासी मदद के लिए आगे आए, तब इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अनुचित है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

फिलहाल दमकल विभाग ने आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है, वहीं स्थानीय प्रशासन ने सोसाइटी में आग से बचाव के उपकरणों और विद्युत व्यवस्था की भी जांच के निर्देश दिए हैं। इस घटना और उसके बाद हुए घटनाक्रम ने वृंदावन के धार्मिक और सामाजिक माहौल में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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