Tuesday, March 10, 2026
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विधानसभा में ममता सरकार ने पेश किया बिल, दुष्कर्म की सजा होगी मौत

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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने मंगलवार (3 सितंबर) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में महिला सुरक्षा पर एक विधेयक पेश किया। इसके जरिए दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है। टीएमसी सरकार ने विधानसभा में ‘अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक’ पेश किया है। इस विधेयक के तहत दुष्कर्म पीड़िता की मौत होने पर दोषियों को मौत की सजा का प्रावधान है। मौजूदा कानूनों में बदलाव के बाद यह विधेयक पेश किया गया है।

दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल एंड हॉस्पिटल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म-हत्या मामले को लेकर ममता सरकार बैकफुट पर है। कोलकाता मामले के बाद ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि वह दुष्कर्म को लेकर कानून बनाएंगी। उन्होंने इसे लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की भी घोषणा की थी। ममता ने कहा था कि वह भी चाहती हैं कि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले। विधानसभा में पेश किए गए इस विधेयक पर भाजपा ने अपनी सहमति जताई है।

अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक के मुख्य बिंदु क्या हैं?

पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक के तीन प्रमुख बिंदु हैं, जिसमें बलात्कारियों को कड़ी सजा का प्रावधान है।

अगर किसी महिला के साथ बलात्कार किया जाता है और फिर उसकी हत्या कर दी जाती है, तो अपराधी को मौत की सजा दी जाएगी।

अगर किसी महिला के साथ बलात्कार किया जाता है, तो इस अपराध को करने वाले अपराधी को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।

अगर किसी नाबालिग के साथ बलात्कार किया जाता है, तो अपराधी को 20 साल की कैद और मौत की सजा दोनों का प्रावधान है।

ये इस विधेयक के तीन प्रमुख बिंदु हैं, जिन्हें केंद्र सरकार के कानून में संशोधन करके पेश किया गया है। बलात्कार को लेकर केंद्र सरकार के कानून में पूरी तरह बदलाव नहीं किया जाएगा। लेकिन इस नए कानून के जरिए 21 दिनों में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। अगर 21 दिनों में फैसला नहीं दिया जाता है, तो पुलिस अधीक्षक की अनुमति से 15 दिन और दिए जाएंगे। यह समवर्ती सूची में है और हर राज्य को इसमें संशोधन करने का अधिकार है।

विधेयक को कानून बनाने के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा

विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जिनके हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। उम्मीद है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस को विधेयक पर हस्ताक्षर करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। राज्यपाल की मंजूरी से ही राज्य का कानून बनता है। अगर राज्यपाल इस विधेयक को कानून में बदलने के बारे में कोई राय नहीं बना पाते हैं तो वे इसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। हालांकि, राज्यपाल से मंजूरी मिलना ही राज्य में इसे कानून बनाने के लिए काफी है।

केंद्र सरकार बलात्कार पर नया कानून लाए: अभिषेक बनर्जी

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने मांग की है कि पश्चिम बंगाल सरकार की तर्ज पर केंद्र सरकार को भी बलात्कार पर सख्त कानून बनाना चाहिए और इसे अगले सत्र में पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हर 15 मिनट में एक बलात्कार की घटना के भयावह आंकड़ों को देखते हुए, बलात्कार विरोधी व्यापक कानून की मांग पहले से कहीं अधिक जोर पकड़ रही है। बंगाल अपने बलात्कार विरोधी विधेयक के साथ इस मामले में अग्रणी है। सरकार को अब निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए, चाहे वह अध्यादेश के माध्यम से हो या आगामी संसद सत्र में बीएनएसएस संशोधन के माध्यम से, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि न्याय शीघ्रता से हो और सजा कड़ी हो। अभियुक्तों की सुनवाई और दोषसिद्धि 50 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए।”