NSA Ajit Doval: भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की है। यह बैठक भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में रिश्तों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की है।
25वें दौर की SR वार्ता से पहले हुई बैठक
डोभाल और हान झेंग की मुलाकात विशेष प्रतिनिधियों (SR) की बातचीत के 25वें दौर से पहले हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने पहले बनी सहमति के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार किया। खासतौर पर सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता मजबूत करने के तरीकों पर बातचीत हुई।
On 25 August, NSA and Special Representative on the India-China Boundary Question, Shri Ajit Doval called on H.E. Han Zheng, Vice President of the People's Republic of China. Prior to the 25th Round of the SR Talks today, NSA and VP Han discussed ways to strengthen peace &… pic.twitter.com/Mm34aOiAp6
— India in China (@EOIBeijing) August 25, 2026
शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा
डोभाल की चीन यात्रा ऐसे समय हुई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों देशों के अधिकारी उनके आने की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हो सकती है।
वांग यी के निमंत्रण पर चीन पहुंचे डोभाल
NSA अजीत डोभाल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग पहुंचे हैं। वह वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव (SR) बातचीत में हिस्सा लेंगे।
2003 में शुरू हुई थी SR प्रक्रिया
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव प्रक्रिया की शुरुआत 2003 में हुई थी। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबे सीमा विवाद का व्यापक समाधान तलाशना है। ऐसे में SR वार्ता का नया दौर सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के रुख के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने शांति को बताया जरूरी
सीमा विवाद के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार (22 अगस्त) को कहा था कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनका यह बयान उस समय आया, जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरें सामने आई थीं।
सीमा की स्थिति से तय होंगे रिश्ते
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की ठंड के बीच एक बहुत बुरे दौर का सामना किया, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था। सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है और सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”
चीन ने भी स्थिति को बताया स्थिर
वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा था कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल स्थिति आम तौर पर स्थिर है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और सीमा वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब संबंधों में स्थिरता बनाए रखने पर दोनों पक्ष जोर दे रहे हैं।
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