Sawan Second Somwar 2026: सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन एक साथ 7 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस सोमवार का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। सावन सोमवार को पहले से ही पुण्य फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। सावन शिवरात्रि से पहले कांवड़ यात्रियों के लिए भी यह दिन खास है। इस दिन बड़ी संख्या में जलाभिषेक किए जाने और मंदिरों में भारी भीड़ होने का अनुमान है।
एक साथ बन रहे 7 शुभ संयोग
दूसरे सावन सोमवार को सोम प्रदोष व्रत, एकादशी पारण, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, हंसराज योग, वज्र योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग एक साथ बन रहा है। यही वजह है कि धार्मिक दृष्टि से इस दिन को बेहद अहम माना जा रहा है।
सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग
दूसरे सावन सोमवार को सावन का पहला प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसकी पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है। प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से शुरू होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से दुख, रोग, दोष, पाप और कष्ट दूर होते हैं।
एकादशी व्रत का होगा पारण
इस दिन कामिका एकादशी व्रत का पारण भी होगा। एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद किया जाएगा। द्वादशी तिथि सुबह 08:00 ए एम तक रहेगी और इसके बाद भगवान शिव से जुड़ी त्रयोदशी तिथि शुरू होगी।
कर्क राशि में बनेगा त्रिग्रही योग
दूसरे सावन सोमवार को कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रही योग बना हुआ है। 5 अगस्त को बुध के कर्क राशि में गोचर करने के बाद यह योग बना है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग से मिथुन, कर्क और कन्या राशि के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है।
बुधादित्य राजयोग भी रहेगा
कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है। यह शुभ योग दूसरे सावन सोमवार के दिन भी विद्यमान रहेगा। ज्योतिष में बुधादित्य योग को बुद्धि, कार्यक्षमता और सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
कर्क में गुरु से हंसराज योग
इस समय देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में विराजमान हैं। कर्क बृहस्पति की उच्च राशि मानी जाती है। इसी वजह से हंसराज योग का निर्माण हो रहा है, जो इस सावन सोमवार के महत्व को और बढ़ाता है।
रात 10:27 बजे तक रहेगा वज्र योग
दूसरे सावन सोमवार को सुबह से वज्र योग बनेगा और यह रात 10:27 PM तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस योग में नए काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान वाहन, सोना आदि खरीदने की भी मनाही बताई गई है।
रात 10:27 बजे से सिद्धि योग
वज्र योग समाप्त होने के बाद रात 10:27 PM से सिद्धि योग शुरू होगा, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। मान्यता है कि सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होगा जलाभिषेक
दूसरे सावन सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू किया जा सकता है। वैसे भक्त सुबह किसी भी समय शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं। प्रदोष का संयोग होने के कारण शाम के समय भी जलाभिषेक किया जाएगा।
सुबह के प्रमुख शुभ मुहूर्त
दूसरे सावन सोमवार को जलाभिषेक के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक, अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक, शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा।
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