अंतरिक्ष जगत से एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX के रॉकेट का लगभग 4,000 किलोग्राम वजनी एक निष्क्रिय हिस्सा चंद्रमा की सतह से टकरा गया। यह टक्कर किसी मिशन का हिस्सा नहीं था, बल्कि लंबे समय से अंतरिक्ष में अनियंत्रित रूप से घूम रहे रॉकेट का मलबा था। बता दें कि यह भयंकर हादसा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण में आने के कारण हुई। बताया जा रहा है कि यह मलबा करीब 18 महीने से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच अंतरिक्ष में भटक रहा था।
तेज रफ्तार टक्कर से बना बड़ा क्रेटर
जानकारी के अनुसार, रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा की सतह से टकराया। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस टक्कर से पैदा ऊर्जा हजारों किलोग्राम विस्फोटक के बराबर रही। प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि चंद्रमा की सतह पर करीब 20 से 30 मीटर चौड़ा और गहरा क्रेटर बनने की संभावना जताई जा रही है। टक्कर के बाद बड़ी मात्रा में धूल और चंद्र मिट्टी कई किलोमीटर तक फैल गई।
भारतीय समयानुसार यह घटना दोपहर करीब 12:05 बजे हुई। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि टक्कर के समय हल्की चमक दिखाई दे सकती है, लेकिन घटना चंद्रमा के उस हिस्से पर हुई जहां तेज धूप थी। इसी वजह से पृथ्वी से इसे सामान्य रूप से देख पाना संभव नहीं हो सका।
वैज्ञानिकों को मिला नया अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में बढ़ते स्पेस डेब्रिस की समस्या की ओर भी संकेत करती है। वैज्ञानिक अब इस घटना का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि तेज गति से किसी भारी वस्तु के चंद्रमा से टकराने पर उसकी सतह पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ता है। इस अध्ययन से चंद्रमा की भू-संरचना और सतह की प्रकृति से जुड़ी नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह घटना दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियों और निजी स्पेस कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी मानी जा रही है कि मिशन पूरा होने के बाद अंतरिक्ष में छोड़े गए मलबे के सुरक्षित प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे अनियंत्रित हादसों से बचा जा सके।
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